
रामलीला मंचन आमतौर पर आस्था, संस्कृति और प्रतीकात्मक युद्ध का दृश्य होता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में यह मंच अचानक रियल लाइफ थ्रिलर बन गया — और कीमत चुकानी पड़ी “रावण” बने एक कलाकार को। जिस तीर को दर्शकों ने अभिनय समझा, वही तीर एक आंख की रोशनी छीन ले गया।
कब और कहां हुआ हादसा?
यह मामला 13 नवंबर 2025 की देर रात का है। स्थान — खैरा गांव, शाहगंज थाना क्षेत्र, सोनभद्र।
रामलीला का मंचन चल रहा था। स्क्रिप्ट के मुताबिक श्रीराम को रावण पर तीर चलाना था। लेकिन इस बार तीर भावनाओं पर नहीं, सीधे आंख पर जा लगा।
“स्क्रिप्ट के मुताबिक तीर चला” — लेकिन सुरक्षा गायब
राम का किरदार निभा रहे नैतिक पांडेय ने मंच से तीर छोड़ा। रावण की भूमिका निभा रहे सुनील कुमार उसकी चपेट में आ गए। आयोजन समिति का दावा है कि यह “accidental misfire” था, लेकिन सवाल यही है स्टेज पर असली तीर क्यों था? सेफ्टी चेक कहां था?
एक आंख गई, जिंदगी बदल गई
सुनील कुमार को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया। लेकिन डॉक्टरों ने साफ कर दिया रोशनी अब वापस नहीं आएगी। फिलहाल उनका इलाज वाराणसी में चल रहा है। परिवार सदमे में है और न्याय की मांग कर रहा है।

SC-ST Act में केस, आरोप गंभीर
पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद मामला और गंभीर हो गया। सुनील कुमार SC-ST समुदाय से हैं। परिवार का आरोप है कि इलाज को लेकर बात करने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद पुलिस ने नैतिक पांडेय आयोजक रामसनेही सिंह के खिलाफ SC-ST Act के तहत केस दर्ज कर लिया।
आस्था बनाम लापरवाही: असली सवाल यही है
यह घटना सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं है। यह सवाल उठाती है क्या लोकल आयोजनों में सेफ्टी SOPs नाम की कोई चीज़ है? क्या धार्मिक मंचन के नाम पर रिस्क को नॉर्मलाइज़ कर दिया गया है? और जब हादसा हो जाए, तो क्या जिम्मेदारी भी अभिनय बन जाती है?
रामलीला में रावण हर साल मरता है, लेकिन यहां एक कलाकार की आंख सच में चली गई। आस्था मंच पर होती है, लेकिन लापरवाही पर्दे के पीछे नहीं छुपाई जा सकती। यह हादसा चेतावनी है संस्कृति तभी सुरक्षित है, जब इंसान सुरक्षित हो।
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