Republic Day! देशभक्ति शोर नहीं, संस्कार है! तिरंगे की जय, नियमों के साथ

आशीष शर्मा (ऋषि भारद्वाज)
आशीष शर्मा (ऋषि भारद्वाज)

कल गणतंत्र दिवस है। आज शाम से ही सोशल मीडिया पर देशभक्ति जागेगी, रात होते-होते सड़कों पर डीजे, पटाखे और बाइक सवारों का हुड़दंग शुरू हो जाएगा। और कल शाम तक— वही तिरंगा, जो सुबह गर्व से लहराया गया था, कहीं सड़क पर, कहीं नाली के पास पड़ा दिखेगा।

यही वह पल है, जहाँ सवाल उठता है— क्या यही देशभक्ति है?

भारत माता की जय—एक दिन नहीं, पूरे साल

देशभक्ति दिखाना गलत नहीं है, लेकिन दिखावे की देशभक्ति और संस्कार वाली देशभक्ति में फर्क होता है।
भारत माता की जय तब सार्थक है, जब हम सड़क पर नियम मानें, दूसरों की जान का सम्मान करें। और राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को ठेस न पहुँचाएँ।

तेज़ बाइक, खतरनाक स्टंट और गाली-गलौज देशभक्ति नहीं, बल्कि नागरिक असंवेदनशीलता है।

सड़क भी देश है, पैदल चलने वाला भी नागरिक

गणतंत्र दिवस पर अगर कोई एम्बुलेंस फँस जाए, कोई बुज़ुर्ग सड़क पार न कर पाए, या कोई बच्चा डर जाए— तो तिरंगा हाथ में होने के बावजूद हम देश का सम्मान नहीं कर रहे होते। देश सिर्फ मंच पर नहीं, सड़क पर भी बसता है।

असली देशभक्ति क्या है?

असली देशभक्ति नियमों का पालन है। सार्वजनिक जगहों का सम्मान है। और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बचाए रखना है।

देशभक्ति आवाज़ से नहीं, आचरण से पहचानी जाती है।

तिरंगे का प्रयोग करने के बाद उसका सम्मान कैसे रखें?

यह जानना बहुत ज़रूरी है— तिरंगा सिर्फ लहराने की चीज़ नहीं, संभालने की जिम्मेदारी भी है।

तिरंगे के सम्मान के नियम (Flag Code of India)

तिरंगे को ज़मीन पर, पानी में या कचरे में नहीं गिरने दें। उपयोग के बाद उसे साफ और सम्मानजनक स्थान पर रखें। अगर तिरंगा काग़ज़ या कपड़े का है और खराब हो गया हो, तो उसे अकेले में, पूरे सम्मान के साथ जलाया जाए। तिरंगे को सजावट के रूप में इस्तेमाल न करें। फटे, मैले या झुके हुए झंडे को कभी न फहराएँ।

याद रखिए— तिरंगे का अपमान, अनजाने में भी, अपमान ही होता है।

देशभक्ति अगर सिर्फ एक दिन की हो, तो वह शोर है। लेकिन अगर 365 दिन के व्यवहार में हो, तो वही गणतंत्र की असली जीत है।

तिरंगा तभी ऊँचा है, जब हमारा आचरण ऊँचा है।

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