चीन ने चांदी की बत्ती जलाई, जनवरी में कीमतें रॉकेट की तरह आसमान!

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

जनवरी 2026 के पहले 24 दिनों में चांदी की कीमतों में 1 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा का उछाल देखने को मिला। इसका सबसे बड़ा कारण चीन की नई नीति है।

चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा सिल्वर प्रोड्यूसर और रिफाइनर है, ने 1 जनवरी 2026 से चांदी को ‘स्ट्रैटेजिक मटेरियल’ घोषित कर एक्सपोर्ट पर सख्त नियंत्रण लगा दिया। पहले बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट की जाने वाली चांदी अब घरेलू इंडस्ट्रीज जैसे सोलर और EV के लिए रिजर्व है।

एक्सपोर्ट के लिए स्पेशल लाइसेंस की आवश्यकता ने वैश्विक सप्लाई को सीमित कर दिया, जिससे फिजिकल सिल्वर की शॉर्टेज और कीमतों में रॉकेट जैसी तेजी आई।

मात्र 24 दिनों में 42.9% रिटर्न

1 जनवरी 2026 को भारत में चांदी की कीमत 2,38,000 रुपये प्रति किलो थी। 12 जनवरी को यह बढ़कर 2,52,000 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। 19 जनवरी को पहली बार यह 3,00,000 रुपये पार कर गई और 24 जनवरी को 3,40,000 रुपये प्रति किलो दर्ज हुई। मात्र 24 दिनों में 42.9% रिटर्न, जो ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।

क्यों चमकी चांदी?

  1. चीन की ग्रीन टेक नीति: दुनिया के 80% से ज्यादा सोलर पैनल चीन में बनते हैं। चांदी का इस्तेमाल फोटोवोल्टिक सेल और EV बैटरी सिस्टम में बढ़ गया है।

  2. सेफ-हेवन डिमांड: अमेरिकी टैरिफ धमकी और ग्लोबल अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की तरफ खींचा।

  3. शॉर्ट स्क्वीज: सप्लाई की कमी और बढ़ती खपत ने कीमतों में अचानक उछाल पैदा किया।

शॉर्ट स्क्वीज क्या है?

शॉर्ट स्क्वीज तब होता है जब ट्रेडर्स उम्मीद करते हैं कि कीमतें गिरेंगी, लेकिन कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं। अपनी भारी हानि से बचने के लिए उन्हें मजबूरी में चांदी खरीदनी पड़ती है। इस मजबूरी से मांग और बढ़ जाती है और कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर जाती हैं। जब तक चीन की ग्रीन टेक इंडस्ट्री बढ़ रही है, चांदी की चमक और बढ़ेगी।

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