लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रावासों की व्यवस्थाओं और खानपान व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने हॉस्टल में सप्ताह में दो दिन नॉनवेज परोसे जाने की परंपरा पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि क्या ऐसा करना वास्तव में जरूरी है। इसके साथ ही छात्रावास परिसर में फैली गंदगी पर भी उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य संबंधी कारणों से समारोह में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकीं राज्यपाल ने जन भवन से ऑनलाइन संबोधन किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
छात्रावासों की व्यवस्था पर उठाए सवाल
राज्यपाल ने कहा कि छात्रावासों में सप्ताह में दो दिन नॉनवेज भोजन परोसे जाने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह अनिवार्य है। साथ ही हॉस्टल के मैदान और परिसर में गंदगी पाए जाने पर भी असंतोष जताया।
उन्होंने अधिकारियों को तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से इस विषय पर विशेष ध्यान देने को कहा।
15 दिन में सुधार के निर्देश
राज्यपाल ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह से संस्थान की व्यवस्थाओं को 15 दिनों के भीतर बेहतर बनाने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि के बाद वह स्वयं व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगी।
दीक्षांत समारोह के दौरान उपमुख्यमंत्री ने भी राज्यपाल के निर्देशों को गंभीरता से लेने की बात कही और संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
डिग्री और पदक पाकर खुश नजर आए मेधावी
गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के तीसरे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों के लिए यह दिन बेहद खास रहा। विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 26 मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया।
समारोह में एमबीबीएस, एमडी, एमएस, डीएम, एमसीएच, बीएससी नर्सिंग, डिप्लोमा और अन्य पाठ्यक्रमों के कुल 340 सफल विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। राज्यपाल ने ऑनलाइन जुड़कर सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
‘मरीजों में भगवान का रूप देखें’
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने डिग्री और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से मरीजों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जहां भी सेवा का अवसर मिले, वहां मरीजों में भगवान का स्वरूप देखकर काम करना चाहिए।
2035 तक दुनिया का हर तीसरा डॉक्टर भारत से होगा: विशेषज्ञ
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल डॉ. वेद प्रकाश मिश्र ने भारतीय चिकित्सा शिक्षा की बढ़ती वैश्विक पहचान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2035 तक दुनिया का हर तीसरा डॉक्टर भारत से शिक्षित होकर निकल सकता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय चिकित्सा शिक्षा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है और देश में मेडिकल शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में देश में 800 से अधिक मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश ले रहे हैं।
तकनीक के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी
डॉ. वेद प्रकाश मिश्र ने भविष्य के डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इलाज का मूल आधार इंसानियत और संवेदनशीलता ही रहेगी।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसे, करुणा और सहानुभूति का रिश्ता कभी खत्म नहीं होना चाहिए, क्योंकि आधुनिक तकनीक मानव संवेदनाओं का विकल्प नहीं बन सकती।
संस्थान ने गिनाईं उपलब्धियां
संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान में एमबीबीएस, नर्सिंग, सुपर स्पेशियलिटी, पैरामेडिकल और पीएचडी सहित कई शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान में शोध गतिविधियों और क्लीनिकल ट्रायल्स का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है तथा आगामी शैक्षणिक सत्र में कुछ पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ाने की योजना है।
