राम मंदिर चढ़ावा विवाद में SIT की एंट्री, पहले ही दिन खंगाले गए रिकॉर्ड; CCTV फुटेज से लेकर दानपात्रों तक हुई पड़ताल

अयोध्या: श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेरफेर और अनियमितताओं के आरोपों की जांच अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने सोमवार को जांच के पहले दिन राम मंदिर परिसर पहुंचकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। टीम ने गणनास्थल का निरीक्षण करने से लेकर निगरानी व्यवस्था, दानपात्रों की सुरक्षा और चढ़ावे की गणना प्रक्रिया तक का विस्तृत अध्ययन किया।

जांच की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा बनी हुई है। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीमित समय में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

गणनास्थल और निगरानी व्यवस्था की हुई जांच

SIT ने सबसे पहले उस स्थान का निरीक्षण किया जहां चढ़ावे की राशि की गणना की जाती है। जांच अधिकारियों ने वहां मौजूद सुरक्षा और निगरानी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच टीम के सवालों के जवाब दिए।

टीम ने सीसीटीवी कैमरों, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली, निगरानी प्रणाली और ड्यूटी चार्ट से जुड़े अभिलेखों की भी जांच की। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया गया।

फुटेज डिलीट होने के आरोप पर भी पूछताछ

जांच के दौरान पूर्व लेखा प्रभारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों के संदर्भ में भी जानकारी जुटाई गई। विशेष रूप से कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने के दावों को लेकर अधिकारियों से सवाल किए गए।

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले राम मंदिर परिसर में निगरानी रिकॉर्ड से जुड़ा कोई भी मामला जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

दानपात्र से बैंक तक की पूरी प्रक्रिया समझी

SIT ने मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों की व्यवस्था, उनके रखरखाव और चढ़ावे की राशि को बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली। जांच दल ने यह भी समझने की कोशिश की कि चढ़ावे की गणना, रिकॉर्डिंग और जमा करने के दौरान कौन-कौन सी व्यवस्थाएं लागू हैं।

प्रारंभिक जांच में टीम का फोकस यह पता लगाने पर है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसका स्वरूप क्या है।

एक सप्ताह में प्रारंभिक रिपोर्ट, 15 दिन में पूरी जांच

सरकार की ओर से SIT को प्रारंभिक रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सौंपने का निर्देश दिया गया है, जबकि विस्तृत जांच रिपोर्ट 15 दिनों में जमा करनी होगी।

बताया जा रहा है कि पहले चरण में जांच टीम कथित घटनाओं की सत्यता की पुष्टि करेगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भी जांचा जाएगा कि कथित गड़बड़ी कब से हो रही थी, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई और मामला केवल नकदी तक सीमित है या इसमें अन्य चढ़ावे भी शामिल हैं।

दूसरे चरण में संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और जांच के आधार पर जवाबदेही तय करने के साथ-साथ व्यवस्थागत सुधारों के सुझाव भी रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे।

रामलला के दर्शन भी किए, उप मंदिरों का लिया जायजा

जांच के दौरान टीम ने रामलला के दर्शन किए और परिसर स्थित अन्य मंदिरों में भी पहुंची। वहां रखे गए दानपात्रों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई।

दिनभर चली इस प्रक्रिया के दौरान प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी जांच टीम के साथ मौजूद रहे। हालांकि जांच अधिकारियों ने मीडिया से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की।

जांच में आपराधिक और सुधारात्मक दोनों पहलू अहम

मंदिर प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि जांच केवल दोषियों की पहचान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी सामने आने चाहिए।

वहीं विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल धन का मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है।

 

Related posts