ईरान के दरवाज़े तक US Navy! USS लिंकन बढ़ा, ट्रंप बोले– ‘ज़रूरत पड़ी तो Action होगा’

अजमल शाह
अजमल शाह

मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से war-like posture की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी को तेज और आक्रामक स्तर पर बढ़ा दिया है।

सबसे बड़ा संकेत तब मिला जब परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) को South China Sea से हटाकर पश्चिम की ओर रवाना किया गया। यह कैरियर अब Gulf of Oman की ओर बढ़ रहा है — यानी सीधे ईरान के तट के पास।

Carrier Strike Group: What’s on Board?

USS Abraham Lincoln अकेला नहीं है। इसके साथ चल रहा है एक पूरा Carrier Strike Group, जिसमें शामिल हैं:

  • F-35 समेत 60+ लड़ाकू विमान
  • 3 Guided-Missile Destroyers
  •  करीब 5,000 नौसैनिक सैनिक

यह तैनाती किसी routine patrol से कहीं ज्यादा मानी जा रही है।

Qatar से Jordan तक Air Power Ready

सिर्फ समुद्र ही नहीं, हवा में भी अमेरिका ने ताकत झोंक दी है। Al Udeid Air Base (Qatar) पर 20+ KC-135 Fuel Tankers तैनात  जॉर्डन में 37 F-15E Strike Eagle Fighters ये टैंकर विमानों को कई दिनों तक लगातार combat sorties उड़ाने की क्षमता देते हैं।

साफ है — Fuel ready है, jets ready हैं

CENTCOM ऑन ग्राउंड

US Central Command के प्रमुख Admiral Brad Cooper खुद मिडिल ईस्ट पहुंच चुके हैं।

  • High-level military meetings
  • Additional air defense systems
  • Extra strategic assets

CENTCOM ने क्षेत्र में अपनी operational readiness को highest alert पर ला दिया है।

Trump Warning: “Big Naval & Air Force Is Moving”

राष्ट्रपति Donald Trump ने खुद इस सैन्य मूवमेंट की पुष्टि करते हुए कहा, “A massive naval and air force group is moving toward Iran. We are watching very closely.”

हालांकि ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि “We would prefer to avoid any incident.”

लेकिन उनकी चेतावनी के लहजे ने साफ कर दिया — Diplomacy first, force always ready.

Next 36 Hours: Why So Critical?

मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार मानते हैं कि अगले 36 घंटे बेहद निर्णायक हो सकते हैं। ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आंतरिक प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई। 22 जनवरी को मशहद में बॉडीबिल्डर Ali Rahbar की फांसी ने हालात और संवेदनशील बना दिए हैं।

जब अमेरिका “Monitoring the situation” कहता है, तो समुद्र में Aircraft Carrier और आसमान में Fuel Tankers भेज देता है। और जब ट्रंप “We want peace” बोलते हैं, तो दुनिया Radar पर blips गिनने लगती है

ईरान के चारों ओर बढ़ती US तैनाती। UN में भारत-चीन का अलग स्टैंड और मिडिल ईस्ट में simmering unrest ये सब मिलकर एक ही सवाल खड़ा करते हैं- Is this deterrence… or the prelude to action?

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