पुरुषों की भारी कमी! महिलाएं अब घंटों के हिसाब से किराए पर पति ले रहीं

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

दुनिया भर में जेंडर गैप एक चिंता का विषय है, लेकिन यूरोप का खूबसूरत देश लातविया इस मामले में सबसे आगे निकल गया है—वो भी गलत दिशा में।
यहां पुरुषों की आबादी इतनी तेजी से कम हुई है कि इसका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी, रिश्तों और घर-परिवार की जिम्मेदारियों पर दिख रहा है।

पुरुष कम, महिलाएं ज़्यादा: बन गया डेमोग्राफी का मिसमैच

रिपोर्ट्स के अनुसार, लातविया में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
परिणाम?

  • घर में हेल्प करने वाला पार्टनर गायब
  • रिश्तों का असंतुलन
  • डेटिंग ऐप्स पर भी लंबी लाइनें

इतना असंतुलन कि अब यहां एक अजीब लेकिन जरूरत के हिसाब से “व्यावहारिक” ट्रेंड शुरू हो गया है।

“किराए पर पति” — एक नई और चौंकाने वाली सर्विस

‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, लातवियाई महिलाएं अब घंटों के हिसाब से “husband for rent” बुक कर रही हैं। ध्यान रहे—यह सेवा रोमांस के लिए नहीं, बल्कि घर के छोटे-मोटे कामों के लिए है।

ये काम शामिल होते हैं—

  • बल्ब बदलना
  • फर्नीचर जोड़ना
  • पाइपलाइन ठीक करना
  • घर की मरम्मत
  • भारी सामान उठाना

मतलब कि जिस काम के लिए भारत में घर में “मामा बुलवा लो” कहा जाता है, लातविया में वहां “हैंडमेन बुक कर लो” कहा जा रहा है।

‘पति ऑन रेंट’ — घंटे का रेट, काम सेट!

लातविया में स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि महिलाएं कह रही हैं— “कमी तो पति की थी, लेकिन खर्चा अब इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर वाला उठा रहा है।”

कुछ महिलाएं मजाक में यह भी कह रही हैं— “फुल-टाइम हसबैंड से अच्छा है ऑन-डिमांड हसबैंड… कम झंझट, ज्यादा काम!”

यह मज़ाक नहीं, असल सामाजिक समस्या है

ह्यूमर के पीछे एक कड़वी हकीकत छिपी है। लातविया में पुरुषों की घटती संख्या—

  • विवाह
  • परिवार
  • जन्मदर
  • घरेलू ज़रूरतों

सब पर असर डाल रही है। ‘हैंडमेन रेंट’ सिस्टम असल में सामाजिक असंतुलन की दर्दनाक तस्वीर है।

क्यों घट रही है पुरुष आबादी? 

विशेषज्ञ कारण बताते हैं—

  • हेल्थ इश्यू
  • माइग्रेशन
  • हाई मॉर्टैलिटी रेट
  • आर्थिक चुनौतियां
  • युवाओं का विदेशों में नौकरी की तलाश

इन सबका मिलकर परिणाम है महिला-पुरुष अनुपात का बिखरना

गहरी समस्या

लातविया भले ही खूबसूरत नजारों वाला देश हो, लेकिन इसके भीतर एक गंभीर सामाजिक संकट पनप रहा है। पुरुषों की कमी से लेकर ‘husband for rent’ जैसी सेवाओं का आ जाना कोई ट्रेंड नहीं, एक चेतावनी है

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