
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक ऐसी लाइन मारी जो इंटरनेशनल पॉलिटिक्स की नई परिभाषा बन सकती है।
उन्होंने साफ कहा –
“अंतरराष्ट्रीय संबंधों में न कोई स्थायी मित्र होता है, न कोई स्थायी शत्रु – बस स्थायी राष्ट्रीय हित होते हैं।”
उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर 50% टैरिफ ठोक दिया है, जिससे दोनों देशों के ट्रेड रिलेशन में खटास आ गई है।
अमेरिका के टैक्स वार पर भारत का इंटरेस्ट जवाब
राजनाथ सिंह ने टैरिफ वॉर और ट्रेड वॉर की स्थितियों को “गंभीर” बताया और कहा कि भारत अब भी “सबका साथ, सबका व्यापार” चाहता है, लेकिन इंटरेस्ट फर्स्ट पॉलिसी से समझौता नहीं करेगा।
“किसी के दबाव में आकर भारत अपने किसानों, दुकानदारों, व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।”
यानि – America ho ya Australia, सबसे पहले हमारा किसान!
डिफेंस में ‘मेड इन इंडिया’ ही असली हथियार है
रक्षा मंत्री ने बढ़ती भूराजनीतिक चुनौतियों (Geo-political challenges) पर भी बात की और कहा कि अब समय आ गया है जब भारत को डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर होना पड़ेगा।

“बाहरी निर्भरता अब कोई विकल्प नहीं, आत्मनिर्भर भारत ही असली समाधान है।”
यह बयान साफ़ दर्शाता है कि भारत अब सिर्फ़ “दूसरों से हथियार खरीदने” वाला देश नहीं, बल्कि खुद “हथियार बनाने और बेचने” वाला बनना चाहता है।
इंटरनेशनल स्तर पर ये लाइन अब शायद यूनाइटेड नेशन्स की दीवार पर भी लिखी जाए –
“No Permanent Friends. No Permanent Enemies. Only Permanent Interests.”
Inter-Nation Ho Ya Inter-Net, इंडिया बोलेगा – मेरा फायदा सबसे ऊपर!
राजनाथ सिंह का यह बयान न सिर्फ़ भारत की बदलती विदेश नीति का संकेत है, बल्कि ये साफ़ संदेश भी है कि नई दिल्ली अब किसी ग्लोबल पावर के दबाव में नहीं आने वाली।
अब भारत बोलेगा –“हमारी दोस्ती दिल से नहीं, डील से होती है!”
MLA दीप्ति की कार को लगी टक्कर, कार बनी कबाड़ – ICU में एडमिट!
