योगी सरकार में सिख विरासत को मिला नया सम्मान

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

योगी आदित्यनाथ की अगुआई में उत्तर प्रदेश सरकार ने सिख परंपरा को लेकर जो ठोस और ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, उन्होंने धार्मिक सम्मान को केवल रस्म नहीं, बल्कि नीति बना दिया है।

पाठ्यक्रम में इतिहास, अब किताबों से गुरुओं की गूंज

2017 से पहले सिख गुरुओं का नाम भी स्कूली किताबों में ढूंढना मुश्किल था। लेकिन योगी सरकार ने 2020 में पहल करते हुए पहली बार सिख इतिहास को स्कूल सिलेबस का हिस्सा बना दिया।

गुरुनानक से लेकर गुरु गोबिंद सिंह और साहिबजादों के बलिदान तक — अब यूपी की नई पीढ़ी इन कहानियों से सीखेगी धर्म, साहस और राष्ट्रभक्ति

लखनऊ में ‘खालसा चौक’ — गौरव को चौराहे पर लाया गया

राजधानी लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र में ‘खालसा चौक’ की स्थापना केवल एक मूर्ति या नामकरण नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक स्वीकार्यता का प्रतीक है।

जहां पहले केवल राजनीतिक नारों से पहचान होती थी, अब वहां सिख परंपरा का स्थायी स्मारक खड़ा है

‘साहिबजादा दिवस’ को सरकारी मान्यता — इतिहास को मिला सम्मान

सीएम योगी ने ‘साहिबजादा दिवस’ को सरकारी मान्यता दी।

यानी अब उत्तर प्रदेश की सरकार खुद यह मानती है कि छोटे साहिबजादों का बलिदान उतना ही पवित्र है जितना सनातन महागाथाओं में लक्ष्मण और अभिमन्यु का त्याग

“पंच तख्त यात्रा योजना” — आस्था के सफर में सरकार साथ

सिख समुदाय की आस्था के पांच केंद्र — श्री हरमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त, श्री हजूर साहिब, श्री दमदमा साहिब और श्री पटना साहिब — अब सिर्फ श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि राज्य सरकार की योजना और सहयोग का हिस्सा हैं।

हर श्रद्धालु को ₹10,000 तक की आर्थिक सहायता, और सुरक्षित-संगठित यात्रा का आश्वासन।

नाथ-सिख एक परंपरा: योगी ने रिश्ता किया रिवाइवल

सीएम योगी का मानना है कि नाथ और सिख परंपरा, दोनों की जड़ें राष्ट्र, धर्म और बलिदान की एक ही भूमि में हैं।

उन्होंने गुरुद्वारों में जाकर सिर्फ “मत्था” नहीं टेका, बल्कि इतिहास का वो पुल दोबारा खड़ा किया जो गुरु नानक और गोरखनाथ के विचारों में था।

गुरुद्वारों और तीर्थ स्थलों का विकास — श्रद्धा को मिला आधार

सरकार ने न केवल भावनाओं को महत्व दिया, बल्कि ढांचे और सुविधाओं को भी सुधारा।

गुरुद्वारों के आसपास सड़कें, टॉयलेट्स, यात्री शेड, मेडिकल सुविधाएं और सुरक्षा को अपग्रेड किया गया।

तुष्टिकरण से हटकर — परंपरा को मिला प्रतिष्ठान

जहां पहले की सरकारें “वोट बैंक तुष्टिकरण” में उलझी रहीं, वहीं योगी सरकार ने परंपरा और पहचान को आधार बनाकर काम किया।

“तुष्टिकरण नहीं, परंपरा का उत्थान चाहिए” — यही मंत्र है जो लखनऊ से लेकर गुरुद्वारों तक गूंज रहा है।

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