20 May Bharat Bandh: आज देशभर में मेडिकल स्टोर बंद, ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट्स की हड़ताल

मुंबई: देशभर में आज दवा दुकानदारों और केमिस्ट्स ने बड़ा आंदोलन शुरू किया है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर 20 मई को राष्ट्रव्यापी मेडिकल स्टोर बंद रखा गया है। यह हड़ताल ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉरपोरेट कंपनियों की कथित अनुचित प्रतिस्पर्धा के विरोध में की जा रही है।

संगठन का दावा है कि देशभर के लाखों दवा विक्रेता इस बंद में शामिल हो रहे हैं, जिससे कई शहरों में मेडिकल स्टोर्स प्रभावित हो सकते हैं।

ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ प्रदर्शन

AIOCD का कहना है कि मौजूदा कानूनों में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, इसके बावजूद बड़े स्तर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री जारी है।

संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में जीएसआर 817(ई) अधिसूचना जारी की थी, लेकिन उसे अब तक कानून का रूप नहीं दिया गया। इसके बावजूद ऑनलाइन दवा कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि इससे पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स के कारोबार पर गंभीर असर पड़ा है।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का भी हवाला

AIOCD ने दावा किया कि ऑनलाइन दवा बिक्री के मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी और अदालत ने इस पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए थे।

हालांकि संगठन का आरोप है कि सरकार ने अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। केमिस्ट्स ने केंद्र सरकार से जीएसआर 817(ई) अधिसूचना को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

छोटे दवा कारोबारियों पर बढ़ा दबाव

संगठन के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान दवाओं की होम डिलीवरी के लिए अस्थायी छूट दी गई थी। लेकिन महामारी खत्म होने के वर्षों बाद भी यह व्यवस्था जारी है, जिसका फायदा ऑनलाइन कंपनियां उठा रही हैं।

AIOCD का कहना है कि बड़ी कंपनियां 20 से 50 प्रतिशत तक की भारी छूट देकर बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं। इससे देशभर के करीब 12.50 लाख छोटे और पारंपरिक दवा विक्रेताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

सरकार से क्या मांग कर रहे हैं केमिस्ट्स?

दवा विक्रेताओं ने सरकार से औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) 2013 के तहत मुनाफे की सीमा पर दोबारा विचार करने की मांग की है।

इसके अलावा संगठन चाहता है कि केमिस्ट्स को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं के वैकल्पिक ब्रांड उपलब्ध कराने का अधिकार मिले, ताकि छोटे दुकानदार भी बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज

AIOCD ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

संगठन का कहना है कि लगातार ज्ञापन और विरोध के बावजूद सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण दवा विक्रेताओं में भारी नाराजगी है।

 

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