
अमेरिका द्वारा लगाए गए हेवी टैरिफ को लेकर अब नई सियासी-डिप्लोमैटिक बहस छिड़ गई है। जहां ब्रिटेन पर सिर्फ 10%, वियतनाम पर 20%, और जापान, दक्षिण कोरिया, EU को भी राहत मिली—वहीं भारत पर सीधा 50% टैरिफ ठोक दिया गया।
पहले 25%, फिर एक और 25%—मतलब कुल आधा व्यापार टैक्स। अब सवाल उठ रहा है—भारत ही क्यों?
अमेरिका का दावा: “मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया”
इस पूरे मामले में अमेरिका ने अब नई वजह सामने रखी है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील इसलिए अटक गई क्योंकि PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया।
लुटनिक के मुताबिक “डील पूरी करने के लिए मोदी जी का फोन जरूरी था। भारतीय पक्ष सहज नहीं था, इसलिए बात आगे नहीं बढ़ी।”
यानी अमेरिका का तर्क साफ है— फोन नहीं आया = डील नहीं = टैरिफ डबल
भारत का पलटवार: “झूठा दावा, 8 बार बात हुई”
भारत सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि टैरिफ के दौरान PM मोदी और ट्रंप के बीच करीब 8 बार बातचीत हुई थी अमेरिका का बयान तथ्यों से परे है।
सरल शब्दों में— “फोन आया था, बात भी हुई थी, लेकिन कहानी कुछ और बताई जा रही है।”
मध्यस्थता वाला पुराना पैटर्न?
दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका का दावा और भारत का जवाब आमने-सामने आया हो। भारत-पाक तनाव के दौरान भी अमेरिका ने मध्यस्थता का दावा किया। भारत ने कहा—कोई तीसरा पक्ष नहीं था। अब टैरिफ के मुद्दे पर भी वही लाइन— अमेरिका का दावा, भारत का साफ इनकार।

“ब्रिटेन को 10% में दोस्ती, वियतनाम को 20% में रियायत, और भारत को 50% में सबक?”
यह मामला सिर्फ टैरिफ का नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर प्ले का भी है।
भारत आज दुनिया की fastest growing major economy, Global supply chain का अहम हिस्सा Strategic partner—but equal terms पर।
यही वजह है कि भारत दबाव में झुकने के बजाय डिप्लोमैटिक जवाब देना ज्यादा सही समझता है।
यह खबर Trade War + Diplomacy + Power Politics का कॉम्बो है। फोन कॉल की कहानी हो या टैरिफ की मार— सच यह है कि भारत-अमेरिका रिश्ते अब सिर्फ दोस्ती नहीं, सौदेबाजी से तय हो रहे हैं।
जब बाप बना विलेन और बेटा बना इंसाफ: ‘जल्लाद’ ने 90s सिनेमा हिला दिया
