“घड़ी नहीं रुकेगी, नेता नहीं थकेंगे!” 24 घंटे चलेगा यूपी विधानसभा

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश की विधानसभा इन दिनों कुछ ज्यादा ही जोश में है। विकसित उत्तर प्रदेश के सपने को साकार करने के लिए अब सदन 24 घंटे तक लगातार चलेगा।
जी हां, आज सुबह 11 बजे से शुरू हुआ ये सत्र, कल सुबह 11 बजे तक बिना ब्रेक के चलेगा — जब तक नेता थक न जाएं, चाय ठंडी न हो जाए, और कुर्सी से चिपक न जाए।

विज़न डॉक्यूमेंट पर चर्चा या चिल्लाहट?

इस विशेष सत्र का उद्देश्य है — ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के विज़न डॉक्यूमेंट पर ठोस चर्चा। लेकिन अब तक का ट्रैक रिकॉर्ड देख कर विपक्ष ने कहा है कि,

“विकास की बात बाद में, पहले माइक कौन फाड़ेगा, ये तय करो।”

बीते दो दिनों में काफी हंगामा हुआ, जिससे सदन की कार्रवाई स्थगित भी करनी पड़ी। यानि चर्चा का ग्राफ विकास से ज़्यादा विवाद की दिशा में बढ़ा।

28 मंत्री बोलेंगे, सीएम 14 अगस्त को देंगे ‘क्लोजिंग’ स्पीच

सरकार की तरफ से विधानसभा में 28 मंत्री और विधान परिषद में 18 मंत्री बोलने वाले हैं। सबसे बड़ा फिनाले होगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन — जो 14 अगस्त को होगा।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि:

“यह संबोधन चुनावी रनवे पर उतरने से पहले का वॉर-अप हो सकता है।”

सदन NON-STOP… लेकिन सोने की आज़ादी भी लोकतंत्र का हिस्सा?

24 घंटे का सत्र सुनकर आम जनता को भले लगे कि “वाह! लोकतंत्र की जागरूकता चरम पर है।”

“दिवस विकास के नाम, लेकिन रात में सिर्फ बातें तमाम”

UP विधानसभा में इस ऐतिहासिक सत्र को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं:

  • क्या सचमुच ये चर्चा ग्राउंड लेवल विकास तक पहुंचेगी?

  • क्या ये ‘24 घंटे’ सिर्फ कैमरा टाइम है या कोई ठोस नीति निकलकर आएगी?

  • और क्या जनता को अगले चुनाव तक विज़न स्लोगन के सिवा कुछ और मिलेगा?

उत्तर प्रदेश की सियासत अब नॉन-स्टॉप मोड में है — सवालों के जवाब मिलें न मिलें, लेकिन बहसें गर्म हैं, माइक्स भी और माहौल भी।

“विकसित यूपी” का सपना तभी पूरा होगा जब यह 24 घंटे का सत्र सिर्फ प्रतीकात्मक न रहकर, नीतिगत रूप से प्रभावशाली भी हो।

क्योंकि एक दिन की चर्चा से वो समस्याएं हल नहीं होतीं…जो सालों से फाइलों में सो रही हैं।

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