“ट्रंप बोले– जी20? सॉरी, अफ्रीका में हम नहीं जाएंगे!”

Jyoti Atmaram Ghag
Jyoti Atmaram Ghag

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि अमेरिका दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी20 सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा। कारण? ट्रंप का दावा है कि वहां “गोरे लोगों पर अत्याचार” हो रहे हैं — एक ऐसा आरोप जिसे विशेषज्ञ “राजनीतिक फिक्शन” बता रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीका बोला– “यह खेदजनक है, सर!”

दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के फ़ैसले को ‘खेदजनक और अनुचित’ बताया। सरकार ने साफ कहा कि देश में किसी भी समुदाय के खिलाफ “संगठित हिंसा या जनसंहार” नहीं हो रहा। यह बयान तब आया जब ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा:

“यह शर्मनाक है कि G20 जैसे इवेंट की मेज़बानी ऐसे देश में हो रही है जहाँ अफ़्रीकानर मारे जा रहे हैं और उनकी ज़मीन छीनी जा रही है।”

“जब तक मानवाधिकार उल्लंघन बंद नहीं होंगे, कोई अमेरिकी नहीं जाएगा”

ट्रंप ने और जोड़ा कि जब तक ये ‘उल्लंघन’ जारी रहेंगे, “कोई भी अमेरिकी अधिकारी इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा।”

यानी, ट्रंप ने ‘अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमेसी’ को भी Truth Social पोस्ट में कन्वर्ट कर दिया। कह सकते हैं— “UN में स्पीच नहीं, अब ट्वीट से चलेगी नीति!”

यह बयान आगामी अमेरिकी चुनावों से जुड़ा है। वह फिर से अपने पारंपरिक “गोरे मतदाता बेस” को टारगेट कर रहे हैं। कई फैक्ट-चेक संगठनों ने साफ कहा कि दक्षिण अफ्रीका में ऐसा कोई जनसंहार नहीं हुआ है। यानी, ‘फैक्ट्स ठंडे हैं, लेकिन ट्रंप के बयान हॉट हैं!’

G20 पर ग्लोबल असर: अमेरिका के बिना अधूरा मेज़बान

जोहान्सबर्ग में होने वाला G20 सम्मेलन अब अधूरा लग सकता है। क्योंकि चाहे कोई पसंद करे या नहीं, अमेरिका की गैरहाज़िरी हमेशा खबर बन जाती है। सवाल ये भी उठ रहा है कि अगर G20 में अमेरिका नहीं गया — तो क्या ट्रंप अब Truth20 शुरू करेंगे?

ट्रंप का “जी20 बहिष्कार” एक बार फिर दिखाता है कि वे राजनीति को भी रियलिटी शो की तरह पेश करने में माहिर हैं। अब देखना ये है कि बाकी देश G20 में डिप्लोमेसी करेंगे या ट्रंप की ट्रुथ सोशल पोस्ट का जवाब देंगे!

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