मां-बाप की अनदेखी पड़ेगी महंगी! Salary कट कर सीधे Parents के खाते में

संजीव पॉल
संजीव पॉल

देश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक eye-opening फैसला सामने आया है। तेलंगाना की कांग्रेस सरकार, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में, ने ऐसा आदेश जारी किया है जो आने वाले समय में देशभर के राज्यों के लिए मिसाल बन सकता है।

अब अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने बुजुर्ग मां-बाप को परेशान करता है या उन्हें इग्नोर करता है, तो उसकी सैलरी का 10% हिस्सा काटकर सीधे माता-पिता के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा।

Salary कटेगी, बहाना नहीं चलेगा

सरकार के आदेश के मुताबिक — अगर माता-पिता शिकायत दर्ज कराते हैं और यह साबित होता है कि उन्हें नजरअंदाज किया गया तो कर्मचारी की सैलरी से सीधा 10% deduction होगा और ये पैसा सरकार के पास नहीं बल्कि सीधे Parents के खाते में जाएगा।

मतलब साफ है — अब “Busy हूं” वाला excuse payroll तक नहीं बचेगा।

अब मां-बाप की Care भी HR Policy में!

अब तक सरकारी कर्मचारियों को डर था — Transfer से Inquiry से Increment रुकने से अब नया डर जुड़ गया है — “मां-बाप नाराज़ हो गए तो Salary कट जाएगी!”

जहां पहले संस्कार घर सिखाते थे, अब सरकार सैलरी स्लिप से याद दिला रही है।

Revanth Reddy Govt का तर्क: Senior Citizens First

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का कहना है कि यह फैसला बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान के लिए जरूरी है।

सरकार का साफ संदेश है — “अगर मां-बाप को इग्नोर किया गया, तो सिर्फ नैतिक नहीं, कानूनी कार्रवाई भी होगी।”

यह आदेश उन मामलों में लागू होगा जहां बेटा या बेटी सरकारी कर्मचारी हैं।

‘Pranaam’ Day-Care Centers: बुजुर्गों के लिए नई पहल

सिर्फ सैलरी कट ही नहीं, तेलंगाना सरकार ने बुजुर्गों के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं हर जिले में ‘प्रणाम’ (Pranaam) डे-केयर सेंटर। वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए dedicated फैसिलिटीज। यानि सिर्फ सजा नहीं, systematic support भी।

Transgender और Divyang के लिए भी बड़े ऐलान

रेवंत रेड्डी सरकार ने social inclusion पर भी बड़ा दांव खेला है, हर नगर निगम में Transgender Co-Option मेंबर। दिव्यांग जोड़ों की शादी पर ₹2 लाख की आर्थिक सहायता। दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए ₹50 करोड़ का बजट। 2026-27 में नई Health Policy लागू होगी। मतलब agenda साफ है — Welfare + Warning, दोनों साथ।

संस्कार अब सिर्फ भाषण नहीं, Policy हैं

तेलंगाना सरकार का यह फैसला सिर्फ एक आदेश नहीं, एक social statement है। जहां आज की भागदौड़ में मां-बाप अक्सर priority list से बाहर हो जाते हैं, वहीं अब सरकार कह रही है — “पहले माता-पिता, फिर Pay Slip।”

अब देखना दिलचस्प होगा क्या दूसरे राज्य भी इस मॉडल को follow करते हैं या नहीं।

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