गोरखपुर के डुमरी खुर्द गांव में शनिवार का दिन किसानों के लिए खास था — या शायद कैमरों के लिए ज्यादा।केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे तो पहले मंच पर गए, लेकिन फिर ऐसा भावुक मोड़ लिया कि मंच छोड़ खटिया पर बैठ गए — बिल्कुल जैसे मामा अपने भांजों से मिलने आया हो। कहीं ये चुनावी स्टंट नहीं? या PR का रील-रेडी मूव? “किसान अन्नदाता हैं, भगवान का स्वरूप हैं” — ये लाइन नई नहीं है नेता जी ने वही पुराना रिकॉर्ड चलाया:“किसान अन्नदाता हैं, कृषि हमारी अर्थव्यवस्था…
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कौन बोला- धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्दों को हटाना चाहिए संविधान से
देश में इन दिनों बारिश कम और संविधान की प्रस्तावना पर बहस ज़्यादा हो रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बयान दे डाला कि, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्द भारतीय संस्कृति के मूल में नहीं हैं। इन्हें हटाया जाना चाहिए। यानि अब संविधान भी ‘रीडिज़ाइन मोड’ में? बर्थ राइट सिटिज़नशिप पर ट्रंप का वार! कोर्ट नहीं रोक पाएंगे आदेश? आपातकाल की वापसी… बयानबाज़ी में शिवराज सिंह का कहना है कि ये दोनों शब्द तो आपातकाल (1976) में जोड़े गए थे, इसलिए “थोड़े एक्स्ट्रा लगते हैं”। सर्वधर्म समभाव ही असली…
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