देवघर मंदिर पर था निशाना, ISI जासूसी का ‘डिजिटल जाल’ बेनकाब

Ghaziabad की गलियों से निकली एक कहानी, सीधे देश की सुरक्षा पर आकर टिक गई। यह कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं… बल्कि असल जिंदगी का वो ‘नेटवर्क’ है, जहां WhatsApp ग्रुप भक्ति नहीं, ब्लास्ट की प्लानिंग शेयर कर रहे थे। और टारगेट? Baidyanath Dham — आस्था का केंद्र, जिसे जासूसी की नजरों ने ‘लोकेशन पिन’ बना दिया। जासूसी का जाल: सोशल मीडिया से सीमा पार तक पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वह किसी साइबर-थ्रिलर से कम नहीं। नौशाद अली—एक नाम, लेकिन रोल पूरा ‘फील्ड ऑपरेटर’। काम क्या था? मंदिर का वीडियो…

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“मोबाइल, सिम और मासूम चेहरे… छुपा था ‘ISI प्लान’! पहले ही खेल खत्म”

कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत है. Ghaziabad में पकड़ा गया एक ऐसा नेटवर्क, जो WhatsApp ग्रुप्स और मोबाइल सिम के पीछे छिपकर देश के 7 राज्यों में तबाही का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा था. चेहरे मासूम, उम्र नाबालिग… लेकिन इरादे इतने खतरनाक कि खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ जाए. ‘रेकी से ब्लास्ट तक’ – साजिश का पूरा रोडमैप पुलिस जांच में सामने आया कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि Inter-Services Intelligence से जुड़ा एक structured network था. पहला चरण:लोकेशन, फोटो और वीडियो भेजनादूसरा…

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लाल किला ब्लास्ट: गलती से हुआ धमाका, जैश-ए-मोहम्मद की थी इससे भी बड़ी साजिश

दिल्ली के दिल — लाल किला — के सामने 10 नवंबर की शाम एक जोरदार धमाके ने पूरे देश को हिला दिया। कार में हुआ यह ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी गाड़ियां भी चपेट में आ गईं। अब तक की जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में 10 लोगों की मौत और कई घायल हुए हैं। लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है… “धमाका प्लान नहीं था, गलती से हो गया!” जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह धमाका आतंकियों की गलती का नतीजा था। असल में, जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के…

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