DJ नहीं, जय श्रीराम! New Year 2026 में Youth ने चुना Spiritual Celebration

जहां कभी नए साल का जश्न डिस्को, होटल, पार्टी और हिल स्टेशन तक सीमित रहता था, वहीं New Year 2026 में एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव देखने को मिल रहा है।उत्तर प्रदेश से उठी Spiritual & Cultural Renaissance की लहर में युवा अब नए साल की शुरुआत Darshan–Poojan से कर रहे हैं। काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन में लाखों युवा श्रद्धालुओं की मौजूदगी इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। काशी-अयोध्या-मथुरा में उमड़ा युवा सैलाब पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक: अयोध्या: 29-30 दिसंबर को ही 5 लाख+ श्रद्धालु काशी विश्वनाथ कॉरिडोर:…

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-30°C में साधु का ध्यान, हिमालय की बर्फबारी में भक्ति की शक्ति

एक वीडियो ने इंटरनेट पर ऐसा धमाका किया है कि लोग पूछ रहे हैं— “ये साधु हैं या हिमालयी पावर बैंक?” वीडियो में एक साधु घुटने तक बर्फ में बैठे हैं, पूरा शरीर— बाल, दाढ़ी, कपड़े तक— बर्फ की मोटी परत से जमा हुआ।ऐसा लगता है जैसे किसी ने live snow statue को “मेडिटेशन मोड” में स्विच कर दिया हो। हवा इतनी ठंडी कि मोबाइल का नेटवर्क नहीं, लेकिन वीडियो इतना गर्म कि इंटरनेट पिघल गया। क्या सचमुच Spiritual Power? या फिर Yogic Science का कमाल? यही बड़ा सवाल है।…

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं – शांत मन ही विश्व शांति की नींव

लखनऊ में आयोजित प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राज्य स्तरीय “विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग)” कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राजयोग के जरिए आध्यात्मिक चेतना, विश्व शांति, और मानवीय मूल्यों की महत्ता पर गहरा संदेश दिया। मन शांत हो, विचार शुद्ध हों तो टिकता है विश्वास राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि “विश्वास वहीं टिकता है, जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध हों।”उन्होंने बताया कि सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की असली आधारशिला है। शांत और स्थिर मन समाज में शांति का बीज बोता है…

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देव दीपावली 2025: जब काशी ने खुद को स्वर्ग से भी ज्यादा रौशन कर दिया

आज कार्तिक मास की पूर्णिमा की पावन संध्या पर भगवान शिव की नगरी काशी सचमुच देवों की नगरी बन गई।गंगा किनारे 20 लाख से अधिक दीयों की स्वर्णिम आभा ने ऐसा दृश्य रचा, मानो खुद देवता भी बालकनी से झाँक रहे हों! शाम 5:30 बजे से दीयों का समंदर उमड़ा — 88 घाट, 96 कुंड और 50,000 तालाबों पर फैली रोशनी ने वाराणसी को एक जीवित स्वर्ग बना दिया।गंगा पार रेती पर तीन लाख दीयों की कतारें देखकर लगा, धरती ने तारों को नीचे बुला लिया हो। नमो से अस्सी…

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“एक मां, दो अवतार! नवरात्र और दुर्गा पूजा का रंग-बिरंगा फर्क”

भारत में मां दुर्गा को पूजने के दो तरीके हैं — एक व्रत से, दूसरा वर्जन से। जी हां! बात हो रही है नवरात्र और दुर्गा पूजा की — एक ही देवी, पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग ट्रीटमेंट। आप सोच रहे होंगे, “मां तो एक ही हैं, फिर पूजा का स्टाइल क्यों बदला-बदला सा है?”तो चलिए, इस दोगुनी भक्ति और दोहरी मस्ती के पीछे का रहस्य खोलते हैं… नवरात्र: नौ रातों की साधना और सादगी का संगम शुरुआत: 22 सितंबर 2025 समापन: 1 अक्टूबर 2025 (बुधवार) जगह: उत्तर भारत, गुजरात,…

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2 से 10 साल की देवी! मिस मत करना वरना पुण्य Miss हो जाएगा!

22 सितंबर 2025 से शुरू हो चुके Shardiya Navratri का उत्सव अब अंतिम चरण में पहुंच रहा है, और भक्तों की नजरें टिकी हैं — अष्टमी (30 सितंबर) और नवमी (1 अक्टूबर) पर। क्यों? क्योंकि यही वो दिन है जब घर-घर होती है कन्या पूजन की divine दावत! लेकिन…क्या आपने कभी सोचा कि जिस कन्या को आप देवी मानकर भोजन करा रहे हैं, उसकी उम्र मायने रखती है? जी हां! 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी के 9 रूपों का प्रतीक माना जाता है। आइए आपको बताते हैं…

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Navratri 2025 Day 1: मां शैलपुत्री पूजा विधि, मंत्र, भोग और रंग का महत्व

नवरात्रि, शक्ति की आराधना का पर्व, 22 सितंबर 2025 से आरंभ हो चुका है। पहले दिन की पूजा मां शैलपुत्री को समर्पित होती है, जो देवी दुर्गा का पहला रूप हैं। इस दिन व्रत, कलश स्थापना और मां के मंत्रों से पूजा करके शक्ति, सौभाग्य और शांति का आशीर्वाद लिया जाता है। कौन हैं मां शैलपुत्री? मां शैलपुत्री, हिमालय राज की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी मानी जाती हैं। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र, हाथ में त्रिशूल और कमल, वृषभ (बैल) की सवारी करती हैं। ये शक्ति, संयम और भक्ति…

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