धर्मपरायण vs. धर्मांधता: फर्क जान लीजिए, बाद में मत कहना बताया नहीं!

मित्रों, ज्ञान एक मुफ्त चीज़ है— बस दिमाग का थोड़ा सा स्पेस चाहिए। इसी स्पेस की कमी के कारण लोग धर्मपरायण (भावना) और धर्मांधता (अंधभावना) को एक ही समझ लेते हैं। और फिर बोलते हैं— “किसी ने बताया ही नहीं।” तो आज सुन लीजिए, समझ लीजिए… और सेव करके रखिए। 1. धर्मपरायणता क्या है? – Faith with Logic धर्मपरायण होना मतलब— ईश्वर में विश्वास रखना, सदाचार, करुणा, संयम, सेवा जैसे मूल्यों का पालन करना। तर्क और अध्यात्म दोनों को साथ लेकर चलना। ये वही लोग होते हैं जो पूजा भी…

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“हिंदू हूँ या सनातनी?” — धर्म भी हो गया ब्रांड, तो पहचान कौन सी रखी जाए?

आज सोशल मीडिया पर हर तरफ आवाज़ है — “मैं सनातनी हूँ” या “मैं हिंदू हूँ”। लेकिन क्या दोनों में फर्क है या ये दो नाम एक ही रास्ते के हैं? असल में “धर्म” का मतलब religion नहीं, बल्कि कर्तव्य, नीति और सत्य के मार्ग पर चलना है। धर्म वो नहीं जो मंदिर में दिखे, बल्कि वो है जो मन में जगे। “सनातन” शब्द कहां से आया? “सनातन” शब्द संस्कृत से लिया गया है — इसका अर्थ है जो न कभी शुरू हुआ और न कभी खत्म होगा। वेद, उपनिषद…

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