रामानंद सागर की “गीत” एक ऐसी फिल्म है जिसमें अगर आपने ध्यान न दिया तो लगता है, “अरे वाह, कितना मीठा संगीत!” लेकिन ध्यान दो, तो एहसास होता है कि संगीत के पीछे एक गहरी साजिश चल रही है। इसमें राजेन्द्र कुमार हैं – एक भोले-भाले चरवाहे बने हुए, माला सिन्हा हैं – मंच पर चमकती अदाकारा, और फिर आते हैं सुजीत कुमार – एक ऐसा कुँवर जो प्यार में बर्बाद नहीं, क्रिमिनल बन जाता है। म्यूजिकल लव स्टोरी जिसमें खून, धोखा और जुर्म भी है कमला, यानी माला सिन्हा,…
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रेट्रो रिव्यू : ‘बिन फेरे हम तेरे’ – शादी के बिना भी पूरी ज़िंदगी का साथ
आशा पारेख ने जमुना के किरदार में ऐसा जान डाल दिया है कि लगेगा कि आपके मोहल्ले की कोई “कठिन ज़माने की औरत” बोल रही है।बेच दी गई, बंधक बनाई गई, और फिर भी बिना शादी के एक आदमी और उसके बच्चों की ज़िम्मेदारी उठाई — जमुना संघर्ष की चलता-फिरता प्रतीक बन जाती हैं। रिश्तों का मेलोड्रामा: शादी नहीं, पर संस्कार पूरे! जमुना और जगदीश शर्मा (राजेंद्र कुमार) का रिश्ता बिना शादी के पति-पत्नी जैसा दिखाया गया है। ये फिल्म 70s की होते हुए भी एक “लिव-इन विद सेंटीमेंट्स” वाला…
Read MoreSuraj (1966) Movie Review: राजेंद्र कुमार की आखिरी सुपरहिट
टी. प्रकाश राव के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सूरज’, राजसी प्रेम कहानी को उस दौर की मसालेदार बॉलीवुड स्टाइल में परोसती है। यहाँ नायक सूरज सिंह (राजेंद्र कुमार) सिर्फ दिल चुराता नहीं, बल्कि राजकुमारी भी चुरा लेता है – वो भी घोड़े पर बैठकर, जैसे हॉलीवुड और राजश्री की फिल्मों में होता है। कथानक: कौन राजकुमार, कौन डाकू? राजकुमार प्रताप की गद्दी पर बैठा है वो, जो असल में संग्राम सिंह का बेटा है! और असली राजकुमारी को डाकू सूरज उठा ले जाता है — बस यहीं से शुरू होती…
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