गोण्डा: पुलिस लाइन गोण्डा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक देवीपाटन परिक्षेत्र, गोण्डा अशोक कुमार और पुलिस अधीक्षक गोण्डा अभिषेक की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान पुलिस लाइन परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहा। विधि-विधान से हुआ भगवान श्रीकृष्ण का पूजन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर पुलिस अधीक्षक गोण्डा अभिषेक ने विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण से जनपद में शांति, सौहार्द, सुख-समृद्धि और जनकल्याण…
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कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है? जानिए कंस के अत्याचार से लेकर श्रीकृष्ण के जन्म और वध तक की पूरी पौराणिक कथा
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ-साथ अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक भी माना जाता है। जन्माष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव के कारावास और श्रीकृष्ण के गोकुल पहुंचने की घटना से जुड़ी है। कंस के अत्याचार से परेशान थी मथुरा…
Read MoreJanmashtami 2025: जानें पूजा का तरीका और आपकी राशि का खास उपाय
हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पूरा देश श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही श्रद्धा और धूमधाम से मनाता है। इस दिन कान्हा के भक्त उपवास रखते हैं, बाल गोपाल का श्रृंगार करते हैं, पंचामृत से स्नान कराते हैं और माखन-मिश्री, तुलसी दल जैसे प्रिय भोग अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में देवकी और वासुदेव के घर हुआ था। इस वर्ष 2025 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त (शनिवार) को मनाई जा रही है। रात 12:04…
Read Moreकृष्ण जन्माष्टमी पर फलाहारी बाबा की अपील ने बढ़ाई धर्म की दूरियां?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष बाबा दिनेश फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर आग्रह किया है कि इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुर जी की पोशाकें केवल सनातनी हिंदू कारीगरों से ही खरीदी जाएं। उनका तर्क?“कुछ कारीगर धार्मिक परंपराओं को नहीं समझते और स्वच्छता का ध्यान नहीं रखते।” बाबा जी यहीं नहीं रुके — उन्होंने यह भी मांग की कि नंद उत्सव और भोग-पूजा मूल गर्भगृह में होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालु ठाकुर जी को माखन-मिश्री अर्पित कर सकें। संत समाज भी समर्थन में… पर…
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