लखनऊ: मिट्टी के बर्तनों को आकार देने वाले कुम्हारों के पारंपरिक कामकाज में अब सौर ऊर्जा नई भूमिका निभाने जा रही है। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड पहली बार कारीगरों को सौर ऊर्जा से चलने वाली चाक उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। इससे बिजली पर होने वाला खर्च कम होगा और कुम्हार कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकेंगे। इससे उनकी आमदनी बढ़ने की भी उम्मीद है। अब तक माटीकला बोर्ड की ओर से कारीगरों को बिजली से चलने वाली चाक दी जाती थी। इस बार पारंपरिक माटीकला को…
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