Ghaziabad की एक हाईराइज सोसाइटी…दरवाजा बंद… फोन खामोश…अंदर एक मां की लाश, जो दो दिन से वहीं पड़ी थी…और एक बेटा, जो उसी घर में सांस ले रहा था…फिर अचानक 13वीं मंजिल से गिरती एक परछाईं। ये खबर नहीं है…ये शहर के बीचों-बीच पनपता हुआ अकेलापन है। क्या हुआ उस दिन: टाइमलाइन में त्रासदी 19 मार्च—एक तारीख, जो अब उस सोसाइटी के लिए सिर्फ कैलेंडर नहीं, एक दहशत बन चुकी है। 42 साल का राजवीर… पेशे से ज्योतिषी…अपनी 70 साल की मां के साथ रहता था। मां की मौत हो…
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