भोर से पहले ही लखनऊ जाग गया… और इस बार अलार्म नहीं, आस्था ने उठाया। जब शहर सो रहा था, तब मंदिरों की चौखट पर हजारों कदम अपनी उम्मीदें लिए खड़े थे… और हर आवाज सिर्फ एक थी—“जय श्री राम।” ये सिर्फ पूजा नहीं… ये वो दिन है जब शहर खुद को भूलकर एक भावना में बदल जाता है। आस्था का विस्फोट Lucknow में ज्येष्ठ मास का पहला बड़ा मंगल किसी त्योहार से ज्यादा, एक भावनात्मक लहर बनकर उभरा। तड़के से ही मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें यह…
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