कंगाली में ‘शराब’ सहारा—Pakistan ने 50 साल बाद खोला बीयर का दरवाज़ा

जिस देश में शराब पर पाबंदी को “धर्म” से जोड़ा गया, वहीं अब वही शराब “अर्थव्यवस्था” बचाने का जरिया बन रही है। यह सिर्फ एक policy change नहीं, बल्कि मजबूरी की वो कहानी है जहां ideology और economy आमने-सामने खड़े हैं। सवाल ये नहीं कि Pakistan शराब बेच रहा है, सवाल ये है कि क्या Pakistan अब अपने ही बनाए नियमों से हार रहा है। एक तरफ जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, दूसरी तरफ सरकार विदेशी मुद्रा के लिए ऐसे रास्ते खोल रही है जिन्हें कभी “गुनाह”…

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