लखनऊ के विकास नगर में आग लगी… लेकिन जली सिर्फ झुग्गियां नहीं थीं। उस आग में इंसानियत भी धुएं बनकर उड़ गई। और अब जो बचा है… वो सिर्फ राख नहीं, बल्कि एक खामोश साजिश का शक है। ये कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं है…ये उस सिस्टम की कहानी है जो हर बार जलता है, लेकिन कभी पकड़ा नहीं जाता।और इस बार सवाल ज्यादा खतरनाक हैं। आग या इत्तेफाक? सवाल यहीं से शुरू होता है विकास नगर में लगी आग को अगर आप सिर्फ एक “दुर्घटना” मानते हैं… तो…
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