
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 81 वर्षीय कलमाड़ी ने पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में अंतिम सांस ली।
उनका पार्थिव शरीर दोपहर 2 बजे तक एरंडवाने स्थित कलमाड़ी हाउस में रखा जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार नवी पेठ के बैकुंठ श्मशान भूमि में 3:30 बजे होगा।
Air Force Officer से Political Power Corridor तक
राजनीति में आने से पहले सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर थे। उन्होंने NDA पास कर 1964 में Air Force जॉइन की, और 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्धों में योगदान दिया।
1972 में सेवा से मुक्त होने के बाद उन्होंने NDA में ट्रेनिंग भी दी — यानी सियासत से पहले राष्ट्रसेवा उनकी पहचान थी।
संजय गांधी ने खोला राजनीति का दरवाज़ा
वायुसेना छोड़ने के बाद कलमाड़ी ने एक फास्ट-फूड आउटलेट शुरू किया, यहीं उनकी मुलाकात संजय गांधी से हुई।
यहीं से उनकी राजनीति की entry हुई। वे महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के अध्यक्ष, फिर 1982 में राज्यसभा सांसद बने।
1996 और 2004 में पुणे से लोकसभा पहुंचे।
रेल मंत्री और Sports Administrator
नरसिम्हा राव सरकार में वे रेल राज्य मंत्री बने और रेल बजट भी पेश किया। 1996 में वे Indian Olympic Association (IOA) के अध्यक्ष बने — वो भी निर्विरोध, दो बार। 2000 से 2013 तक वे Asian Athletics Association के अध्यक्ष रहे।

CWG Scam: उपलब्धियों पर लगा सबसे बड़ा दाग
साल 2010 के Delhi Commonwealth Games उनके करियर का सबसे विवादित अध्याय रहा। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद CBI और ED की जांच, 2011 में गिरफ्तारी और 10 महीने जेल।
हालांकि 2025 में क्लोजर रिपोर्ट के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल गई — लेकिन सियासी छवि तब तक बदल चुकी थी।
कलमाड़ी का जीवन भारतीय राजनीति की उस तस्वीर जैसा रहा — जहां राष्ट्रसेवा से शुरुआत होती है, सत्ता शिखर तक पहुंच मिलती है, और फिर विवाद इतिहास बन जाते हैं… लेकिन नाम हमेशा headline में रहता है।
सोमनाथ: हमले के 1000 साल बाद भी अडिग, PM ने लिखा ब्लॉग
