हर 8 मिनट में लापता हो रहा बच्चा, Supreme Court ने मांगा 6 साल का डेटा

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

देश में बच्चों के लगातार गायब होने की घटनाओं ने अब Supreme Court को भी झकझोर दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि यह सिर्फ अलग-अलग घटनाएं नहीं हो सकतीं — इसके पीछे nationwide organised network की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस पूरे मुद्दे की deep investigation करे और यह पता लगाए कि क्या इन मामलों में कोई common pattern है।

राज्यों की सुस्ती पर कोर्ट का तंज

सुनवाई के दौरान जब केंद्र की ओर से बताया गया कि करीब एक दर्जन राज्यों ने अब तक डेटा नहीं दिया है, तो कोर्ट का मूड साफ बिगड़ गया।
बेंच ने सख्त लहजे में कहा, “जब पूरे देश का डेटा ही नहीं आएगा, तो सच्चाई सामने कैसे आएगी?”

Supreme Court ने चेतावनी दी कि data sharing में लापरवाही करने वाले राज्यों पर सख्त आदेश जारी हो सकते हैं।

6 साल का डेटा, एक ही प्लेटफॉर्म पर

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पिछले 6 वर्षों में लापता बच्चों का पूरा ब्योरा compile कर Women & Child Development Ministry की वेबसाइट पर public किया जाए। ताकि सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि समाज भी सच देख सके।

Rescue हुए बच्चों के इंटरव्यू का सुझाव

कोर्ट ने एक अहम सुझाव देते हुए कहा कि जिन बच्चों को अपहरणकर्ताओं से बचाया गया है, उनके structured interviews होने चाहिए।

इन बातचीतों से यह समझा जा सकता है कि अपराधी कैसे काम करते हैं। बच्चों को कहां ले जाया जाता है। क्या कोई गिरोह बार-बार एक ही तरीका अपना रहा है।

यानी सुराग बच्चों के पास हैं, बस सिस्टम को सुनना होगा।

हर 8 मिनट में एक बच्चा गायब — डराने वाला सच

एक NGO की याचिका में पेश आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर 8 मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम पर सीधा सवाल है। Supreme Court ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह राज्यों के साथ मिलकर एक मजबूत tracking और rescue mechanism तैयार करे।

देश Digital India बन रहा है, UPI सेकंड में पैसा भेज देता है, लेकिन बच्चों का डेटा सालों से “pending” है। Court का संदेश साफ है बच्चों की सुरक्षा कोई फाइल नहीं, ज़िम्मेदारी है।

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