Rajendra Bharti की विधानसभा सदस्यता खत्म: देर रात खुला सचिवालय

सत्येन्द्र सिंह ठाकुर
सत्येन्द्र सिंह ठाकुर

रात के साढ़े 10 बजे… बंद विधानसभा के दरवाजे अचानक खुलते हैं… और कुछ ही देर में एक विधायक की कुर्सी खाली घोषित कर दी जाती है। Madhya Pradesh की राजनीति में यह सीन किसी थ्रिलर से कम नहीं, लेकिन हकीकत इससे भी ज्यादा तीखी है। सवाल उठ रहा है—क्या यह कानून की कार्रवाई है या सियासी चाल?

कैसे खत्म हुई सदस्यता?

दतिया से कांग्रेस विधायक Rajendra Bharti की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। विधानसभा सचिवालय ने देर रात कार्रवाई करते हुए उनकी सीट को रिक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

इस दौरान प्रमुख सचिव Arvind Sharma खुद विधानसभा पहुंचे और सचिवालय खुलवाकर चुनाव आयोग को सूचना भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

आधी रात का ऑपरेशन क्यों?

सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हुआ है कि यह पूरी प्रक्रिया देर रात क्यों की गई। जैसे ही खबर फैली, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari और वरिष्ठ नेता PC Sharma तुरंत विधानसभा पहुंचे। उन्होंने सीधे सचिवालय में जाकर सवाल किया— “रात में विधानसभा खोलने की जरूरत क्यों पड़ी?”

हालांकि, इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिससे विवाद और गहरा गया।

कांग्रेस का आरोप: ‘बीजेपी के इशारे पर कार्रवाई’

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि यह कदम पूरी तरह राजनीतिक है और भाजपा के दबाव में उठाया गया है। उनका कहना है कि नियमों का पालन नहीं किया गया। प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। विपक्ष को दबाने की कोशिश की जा रही है। यह बयान आते ही मामला सीधा राजनीतिक टकराव में बदल गया।

कोर्ट के फैसले से जुड़ा मामला

दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम एक पुराने केस से जुड़ा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें आपराधिक साजिश (120B), धोखाधड़ी और जालसाजी (420, 467, 468, 471) के तहत दोषी मानते हुए 2 से 3 साल तक की सजा सुनाई।

हालांकि, अपील के लिए 60 दिन की मोहलत देते हुए सजा फिलहाल निलंबित रखी गई है।

सजा के आधार पर गई कुर्सी

कानूनी प्रावधानों के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इसी आधार पर विधानसभा सचिवालय ने यह कार्रवाई की है, लेकिन टाइमिंग और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सियासी पारा हाई

इस पूरे मामले ने Madhya Pradesh की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस इसे “राजनीतिक साजिश” बता रही है वहीं सत्ता पक्ष इसे “कानूनी कार्रवाई” कह सकता है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने के संकेत हैं।

क्या यह सिर्फ कानून का पालन है…या फिर राजनीति का खेल? और सबसे अहम क्या देर रात की यह कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है?

राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होना एक कानूनी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जिस तरीके और समय पर यह हुआ, उसने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

अब नजर इस पर है कि क्या इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी? और क्या यह मामला बड़े राजनीतिक टकराव में बदलेगा?

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