नई दिल्ली: यूजीसी-नेट परीक्षा के कथित पेपर लीक के आरोपों को लेकर सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा लीक की घटनाओं के बावजूद छात्रों की वर्षों की मेहनत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से पहले समाजशास्त्र विषय से जुड़ी एक गोपनीय पीडीएफ उम्मीदवारों के बीच प्रसारित की गई, जिसमें मौजूद लगभग 90 सवाल वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे।
समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते सवाल होने का दावा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर किए गए पोस्ट में कहा कि नीट विवाद के कुछ ही सप्ताह बाद यूजीसी-नेट परीक्षा से पहले 100 पन्नों की एक पीडीएफ सामने आई। उनका दावा है कि यह वही प्रारूप था, जो केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पास उपलब्ध होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडीएफ में शामिल करीब 90 प्रश्न समाजशास्त्र के वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलते थे।
कई राज्यों में प्रश्नपत्र बेचने का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने दावा किया कि कथित प्रश्नपत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 2.25 लाख रुपये में बेचा जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी नेटवर्क ने सीएसआईआर-नेट, एचटीईटी और एडीए जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया था।
केंद्र सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप
अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि नीट और नेट जैसी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बावजूद केंद्र सरकार आवश्यक कार्रवाई करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों छात्रों की कड़ी मेहनत को महत्व नहीं दिया जा रहा और सरकार जवाबदेही से बच रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि छात्रों को न्याय दिलाने के लिए देशभर की सामूहिक आवाज ही बदलाव का माध्यम बन सकती है।
नीट परीक्षा विवाद का भी किया उल्लेख
राहुल गांधी ने अपने बयान में नीट परीक्षा से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक के आरोप सामने आने के बावजूद सरकार परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखने में सफल नहीं रही है।
नीट मामले में पहले भी हुआ था बड़ा विवाद
इससे पहले नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर कथित रूप से लीक होने के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। 3 मई को आयोजित परीक्षा रद्द कर दी गई थी और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी गई थी। इस प्रकरण में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। बाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। इसके बाद से विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
