स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। POCSO एक्ट की स्पेशल कोर्ट ने यौन शोषण से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में Swami Avimukteshwaranand Saraswati के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।

अदालत ने यह निर्देश पुलिस को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है। मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri का नाम भी शामिल किया गया है।

अदालत का स्पष्ट संदेश

एडीजे (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने आदेश पारित करते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे मामलों में देरी या लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने साफ शब्दों में निर्देश दिया कि पुलिस निष्पक्ष और डिटेल्ड जांच सुनिश्चित करे। FIR झूंसी थाने में दर्ज की जाएगी।

यह आदेश उस याचिका के बाद आया, जो Ashutosh Brahmachari ने दायर की थी।

याचिका में क्या कहा गया?

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में धारा 173(4) के तहत आवेदन देकर FIR दर्ज करने और कठोर कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित पक्ष को लंबे समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कथित घटनाओं से जुड़ी एक सीडी भी कोर्ट में प्रस्तुत करने का दावा किया।

कोर्ट ने दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया FIR दर्ज करने का आधार बनता है।

Legal प्रक्रिया अब केंद्र में

यह मामला धार्मिक या राजनीतिक विमर्श से ज्यादा अब कानूनी प्रक्रिया का विषय बन गया है। POCSO एक्ट के तहत आने वाले मामलों में जांच प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे मामलों में अदालत का FIR दर्ज कराने का आदेश यह संकेत देता है कि न्यायिक प्रणाली प्रारंभिक जांच को गंभीरता से ले रही है। अब निगाहें पुलिस की कार्रवाई और जांच की प्रगति पर रहेंगी।

जब मंचों पर नैतिकता के भाषण गूंजते हैं, तो अदालत में तथ्य और सबूत बोलते हैं। कानून की किताब में “छवि” या “पद” का अलग कॉलम नहीं होता। वहां सिर्फ सबूत, गवाह और प्रक्रिया होती है। अब असली परीक्षा बयानबाज़ी की नहीं, जांच की होगी।

पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अगर जांच में आरोप पुष्ट होते हैं, तो मामला आगे ट्रायल की दिशा में बढ़ सकता है। अगर आरोप साबित नहीं होते, तो कानून उसी अनुपात में राहत भी देता है।

लेकिन फिलहाल यह मामला प्रदेश की धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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