नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अपने-अपने विभागों से जुड़े राज्य सरकारों के समकक्ष मंत्रियों के साथ नियमित बैठकें करें, ताकि योजनाओं और विकास कार्यों के क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल बनाया जा सके।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से क्षेत्रवार और सेक्टर आधारित बैठकों का सिलसिला शुरू करने की सलाह दी। उनका जोर ऐसा व्यवस्थित तंत्र विकसित करने पर है, जिसमें केंद्र और राज्य स्तर पर किसी योजना या परियोजना से जुड़ी अड़चनों पर सीधे बातचीत हो सके और उनका समाधान निकाला जा सके।
जल शक्ति मंत्रालय के मॉडल को अपनाने की सलाह
बैठक में प्रधानमंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय की ओर से हाल में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक का उदाहरण दिया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के साथ तीन दिवसीय बैठक आयोजित की थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने भी हिस्सा लिया था। अब उन्होंने दूसरे मंत्रालयों को भी इसी तरह की बैठकों का आयोजन करने के निर्देश दिए हैं।
इस पहल का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में केंद्र और राज्यों के बीच संवाद को नियमित करना और आपसी सहयोग के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कर सकता है अगली बैठक
सूत्रों के मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस तरह का अगला सम्मेलन आयोजित कर सकता है। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय भी राज्यों के साथ इसी तर्ज पर बैठक करने पर विचार कर रहा है।
इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझेदारी को मजबूत करना है, ताकि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों को जमीन पर ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
1-2 सितंबर को हुई थी जल संसाधन मंत्रियों की बैठक
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने 1 और 2 सितंबर को नई दिल्ली में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के साथ विभागीय बैठक की थी। इसमें जल से जुड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, जल स्रोतों की स्थिरता, ‘जल संचय जन भागीदारी’ और ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के क्रियान्वयन समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के अंतिम सत्र में राज्यों के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी से भी बातचीत की थी। इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी मौजूद थे।
सीधी बातचीत से दूर हो सकती हैं योजनाओं की अड़चनें
इस मॉडल के तहत केंद्रीय मंत्रियों को राज्य सरकारों के संबंधित मंत्रियों के साथ सीधे बातचीत का अवसर मिलेगा। बैठकों में योजनाओं की मंजूरी में देरी, धन की कमी, जमीन उपलब्ध नहीं होने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समस्या और योजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आने वाले अंतर जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकेगी।
इसके अलावा राज्य सरकारें अपने स्तर पर अपनाए गए बेहतर तरीकों और सफल अनुभवों को भी साझा कर सकेंगी। ऐसे प्रयोगों को जरूरत के मुताबिक दूसरे राज्यों में लागू किया जा सकता है। इससे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ने के साथ विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को भी गति मिलने की उम्मीद है।
