“दिल्ली नहीं जाने देंगे नीतीश!” — पटना में JDU का बगावती मोड

Ajay Gupta
Ajay Gupta

बिहार की राजनीति में अचानक तापमान बढ़ गया है। Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की खबर ने Janata Dal (United) के भीतर ही हलचल पैदा कर दी है। पटना में मुख्यमंत्री आवास के ठीक बाहर जदयू के प्रदेश महासचिव Amrendra Das Trilok आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
हाथ में बैनर और चेहरे पर गुस्सा—संदेश साफ है “किसी भी कीमत पर नीतीश कुमार को दिल्ली नहीं जाने देंगे।”

राजनीति में बयान अक्सर प्रतीक होते हैं, लेकिन यहां मामला प्रतीक से आगे बढ़कर भावनात्मक विद्रोह का रूप लेता दिख रहा है।

कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा

राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार भर में जदयू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कई जगह पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं। पटना में विरोध इतना तीखा हो गया कि कार्यकर्ताओं ने Sanjay Gandhi की गाड़ी को घेर लिया।
साथ ही जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha और केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी हुई।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राजनीतिक साजिश के तहत नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति से दूर किया जा रहा है।

“बिहार परिवार है, दिल्ली नहीं”

विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का तर्क सीधा है। उनका कहना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता ने वोट किसी पार्टी को नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के चेहरे को दिया था। एक लाइन बार-बार दिख रही है, “बिहार नीतीश कुमार का परिवार है, वह इसे छोड़कर कैसे जा सकते हैं?”

यह भावनात्मक राजनीति है, जिसमें नेता सिर्फ पद नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीक बन जाता है।

पोस्टरों से पट गया पटना

पटना की सड़कों पर इस समय राजनीति सिर्फ टीवी डिबेट तक सीमित नहीं है। Patna में जदयू और भाजपा कार्यालयों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। एसएसपी Kartikeya Sharma के निर्देश पर सीएम हाउस और पार्टी कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शहर की दीवारों पर लगे पोस्टर एक ही सवाल पूछ रहे हैं क्या बिहार का सबसे बड़ा चेहरा अब दिल्ली की राजनीति में शिफ्ट होने जा रहा है?

राजनीति या सत्ता की शतरंज

बिहार की राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब सत्ता के समीकरण अचानक बदले हों। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है। यह केवल राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की भावनात्मक प्रतिक्रिया बन गया है। दिल्ली की राह अगर खुलती है, तो सवाल सिर्फ इतना नहीं होगा कि नीतीश कुमार कहां जा रहे हैं। सवाल यह भी होगा कि बिहार की राजनीति का अगला चेहरा कौन होगा।

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