कांग्रेस का ‘डोर क्लोज़’, सिद्धू फैमिली का ‘पॉलिटिकल यू-टर्न’ मोड ऑन!

अजमल शाह
अजमल शाह

Punjab politics में पिछले दो महीनों से चल रही uncertainty, speculation और sharp statements का अंत आखिरकार एक बड़े राजनीतिक फैसले से हुआ। पूर्व विधायक Dr. Navjot Kaur Sidhu को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। AICC महासचिव Bhupesh Baghel द्वारा इस फैसले की औपचारिक घोषणा ने साफ कर दिया कि पार्टी अब अंदरूनी विद्रोह पर zero tolerance मोड में है।

हालांकि दिलचस्प बात यह है कि 31 जनवरी को Navjot Kaur Sidhu पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुकी थीं, लेकिन कांग्रेस का यह कदम symbolic नहीं, strategic माना जा रहा है।

निष्कासन के बाद और तीखे तेवर

Congress से बाहर होते ही Dr. Sidhu का tone और भी aggressive हो गया। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें “पप्पू” कहा — एक ऐसा शब्द जो आमतौर पर कांग्रेस के विरोधियों की शब्दावली में शामिल रहा है।

यहीं से साफ हो गया कि यह सिर्फ पार्टी छोड़ने का मामला नहीं, बल्कि burn-the-bridge politics है।

“500 करोड़ का सूटकेस” और विवाद की जड़

इस विवाद की नींव दिसंबर में पड़ी थी, जब Navjot Kaur Sidhu ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री वही बनता है जो “500 करोड़ का सूटकेस” लेकर आता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि Navjot Singh Sidhu की सक्रिय राजनीति में वापसी तभी होगी, जब उन्हें CM फेस बनाया जाएगा।

यानि message साफ था — position first, participation later.

BJP की तारीफ और वापसी की चर्चाएं

पिछले कुछ हफ्तों में Dr. Sidhu ने Punjab Congress President Amarinder Singh Raja Warring पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और साथ ही PM Narendra Modi और BJP की खुलकर तारीफ की।

Political observers मानते हैं कि यह सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि directional signalling है। याद दिला दें  Sidhu family का political सफर BJP से ही शुरू हुआ था।

विद्रोह का पुराना रिकॉर्ड

सिद्धू परिवार और rebel politics का रिश्ता नया नहीं है। 2012 में BJP MLA रहते हुए अपनी ही सरकार पर आरोप। BJP से दूरी, AAP से बातचीत। 2017 में कांग्रेस जॉइन। Captain Amarinder Singh से खुला टकराव। हर phase में common factor रहा — conflict + controversy

Navjot Singh Sidhu की चुप्पी

फिलहाल Navjot Singh Sidhu ने पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है। लेकिन राजनीति में खामोशी अक्सर prelude to big move मानी जाती है। Rahul Gandhi पर हुए personal attacks के बाद कांग्रेस में उनके लिए रास्ते लगभग बंद नजर आते हैं।

Punjab politics में कहावत बदल गई है “Party बदलती है, पर drama constant रहता है।”

अब सवाल यही है Sidhu family BJP में वापसी करेगी या कोई नया political experiment शुरू होगा?

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