जंग की आग से बुझी चटोरी गली! उठ गयी महफ़िल- लखनऊ में स्वाद हुआ ठंडा

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

कल तक जहां तवे पर छनकती थी टिक्की आज वहां ताले झूल रहे हैं। 1090 Chatori Gali—जो रात को जागती थी, आज दिन में भी खामोश है। मिडिल ईस्ट की जंग ने सिर्फ सीमाएं नहीं हिलाईं उसने लखनऊ के स्वाद पर भी ताला जड़ दिया है।

जंग का असर: गली-गली तक पहुंची आग

Lucknow की मशहूर फूड स्ट्रीट 1090 Chatori Gali में दुकानें बंद जगह खाली। कारण? कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की किल्लत खाड़ी देशों में जारी तनाव ने सप्लाई चेन को ऐसा झटका दिया कि चूल्हे ठंडे पड़ गए।

“तवा ठंडा, जेब खाली”

यह सिर्फ दुकानों का बंद होना नहीं है यह रोज़ी-रोटी का संकट है। एक दिन में करीब ₹1 लाख का नुकसान। 140 बंद कर्मचारी बेरोजगार।

यहां हर दुकान सिर्फ दुकान नहीं कई घरों का चूल्हा था।

जुगाड़ भी हुआ फेल

कुछ दुकानदारों ने घरेलू सिलेंडर से काम चलाने की कोशिश की कुछ ने छोटे सिलेंडर इस्तेमाल किए लेकिन सच ये है जुगाड़ भी पेट नहीं भर सकता। स्टॉक खत्म, और सप्लाई का कोई भरोसा नहीं।

मजदूरों की मजबूरी

दुकान बंद तो काम बंद…काम बंद तो कमाई बंद। कर्मचारी अब दूसरे काम की तलाश में निकल पड़े हैं। एक दुकान से 1500–3000 की रोज कमाई… अब शून्य।

“स्वाद का शहर, अब संकट का शहर”

यह असर सिर्फ एक गली तक सीमित नहीं है। Lucknow के कई छोटे रेस्टोरेंट और फुटपाथ दुकानों पर भी यही हाल है। बाटी-चोखा हो या समोसा हर स्वाद अब गैस के भरोसे है।

जमीन से आवाज़

आकाश भरद्वाज
“हम लोग रोज जाते थे, ये हमारी शाम की आदत थी। अब जब गली बंद दिखती है तो लगता है जैसे शहर का एक हिस्सा मर गया हो। ये सिर्फ खाने की जगह नहीं थी, ये हमारी यादों की जगह थी।”

अनुभव वर्मा
“हम दोस्तों के साथ यहां घंटों बैठते थे, हंसी-मजाक करते थे। आज जब दुकानें बंद हैं, तो सिर्फ भूख नहीं… खालीपन महसूस होता है। एक जंग इतनी दूर चल रही है, और असर यहां हमारी जिंदगी पर पड़ रहा है—ये डराता है।”

अमन तिवारी
“भइया, यहां का चाट हमारी जिंदगी का हिस्सा था। अब सब बंद है। दुकानदार रो रहे हैं, मजदूर भटक रहे हैं। सरकार को जल्दी कुछ करना चाहिए, नहीं तो ये गली सिर्फ नाम बनकर रह जाएगी।”

अपूर्वा त्रिपाठी 
“मैंने इस गली में बहुत वायरल कंटेंट बनाये हैं, यहाँ का स्वाद और माहौल ज़बरदस्त था दोस्तों के साथ आती थी। लेकिन अब कुछ नहीं है। ये सन्नाटा बता रहा है कई घरों में चूल्हा नहीं जला होगा।”

मीनल चौहान 

ऑफिस के बाद चटोरी गली में हम दोस्त घंटों खाते पीते थे, हर दिन छोटी छोटी पार्टियाँ होती थी। माहौल में सुरक्षा थी तो बेहिचक आते जाते थे। और स्वाद और कीमत दोनों मजेदार थे। मुझे बहुत दुःख हो रहा है।

जब तक जंग टीवी पर थी… सब ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ थी। लेकिन जैसे ही असर थाली तक पहुंचा तब समझ आया असली दर्द क्या होता है। दुनिया की पॉलिटिक्स में तेल-गैस सिर्फ नंबर होते हैं लेकिन यहां वो समोसे की आंच है।

कारोबारियों की मांग साफ है गैस सप्लाई का वैकल्पिक इंतजाम। छोटे व्यापारियों के लिए राहत। वरना चटोरी गली सिर्फ कहानी बन जाएगी।

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