955 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का आरोप! भारतीय मूल के महेंद्र माखीजानी गिरफ्तार, दोष साबित हुआ तो 30 साल तक की जेल

वॉशिंगटन: अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी महेंद्र माखीजानी को कथित तौर पर करीब 10 करोड़ डॉलर (लगभग 955 करोड़ रुपये) की बैंक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों, शेल कंपनियों और गलत जानकारियों के जरिए एक बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया। मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें अधिकतम 30 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है।

44 वर्षीय महेंद्र माखीजानी कैलिफोर्निया के कोरोना डेल मार क्षेत्र में रहते हैं और उनके पास अमेरिका का ग्रीन कार्ड है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उनके खिलाफ बैंकिंग नियमों के उल्लंघन और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक को लगाया चूना!

अधिकारियों के मुताबिक, माखीजानी ने संपत्तियों से जुड़े टाइटल इंश्योरेंस रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर किया। आरोप है कि उन्होंने कई संपत्तियों पर पहले से मौजूद कर्ज और कानूनी दावों की जानकारी छिपाई तथा विभिन्न शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर बैंक को गुमराह किया।

जांच में दावा किया गया है कि इसी कथित योजना के जरिए बैंक से लगभग 10 करोड़ डॉलर की राशि हासिल की गई, जिससे वित्तीय संस्थान को भारी नुकसान हुआ।

रियल एस्टेट लोन से जुड़ा है मामला

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, महेंद्र माखीजानी कैंटर ग्रुप V LLC नामक कंपनी को नियंत्रित करते हैं। कैलिफोर्निया के न्यूपोर्ट बीच स्थित इस कंपनी का एक बैंक के साथ बड़ा ऋण समझौता था।

समझौते के तहत बैंक ने कंपनी को लगभग 10 करोड़ डॉलर उपलब्ध कराए थे, ताकि रियल एस्टेट लोन जारी किए जा सकें या ऐसे ऋण खरीदे जा सकें। इसके बदले संबंधित ऋण और संपत्तियों को बैंक के पास सुरक्षा के रूप में गिरवी रखा जाना था तथा ऋण से प्राप्त धनराशि के जरिए बैंक का पैसा लौटाया जाना था।

सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच हुई कथित गड़बड़ी

जांच एजेंसियों का आरोप है कि सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच टाइटल इंश्योरेंस दस्तावेजों में फर्जी बदलाव किए गए। इन दस्तावेजों में यह दर्शाया गया कि कुछ संपत्तियों पर पहला कानूनी दावा उनकी कंपनी का है, जबकि वास्तविक स्थिति अलग बताई जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि कथित रूप से बदले गए दस्तावेज बैंक तक पहुंचाए गए और इसके बाद बैंक अधिकारियों के साथ हुई ऑनलाइन बैठकों तथा टेलीकॉन्फ्रेंस में भी गलत जानकारी दी गई।

बैंक अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप

जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि माखीजानी ने अपने एक कर्मचारी के माध्यम से दस्तावेज बैंक को भिजवाए और बैंक द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में भ्रामक जानकारी दी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरी योजना बैंक को धोखा देकर बड़ी रकम हासिल करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।

अन्य आरोपों की भी चर्चा

कुछ रिपोर्टों में माखीजानी पर निजी आयोजनों और वहां आने वाले लोगों पर दबाव बनाने जैसे आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, मौजूदा कानूनी कार्रवाई मुख्य रूप से बैंक धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर केंद्रित है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में आरोप सिद्ध होने या न होने का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

 

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