हापुड़ में “जलती चिता से हुक्का… इंसानियत या तमाशा?”

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

श्मशान… जहां खामोशी बोलती है। लेकिन यहां… इंसानियत जल रही थी। एक तरफ 75 साल की बुजुर्ग की अंतिम विदाई…दूसरी तरफ कुछ युवकों का बेहूदा खेल। और सवाल सीधा है हम बदल रहे हैं… या गिर रहे हैं?

घटना: मौत के बीच ‘मजाक’

Hapur के एक श्मशान घाट में जो हुआ…वो सिर्फ घटना नहीं, समाज का आईना है। मुन्नी देवी का अंतिम संस्कार हो चुका था। परिजन लौट चुके थे। लेकिन चिता की आग… अभी जल रही थी। और उसी आग को किसी ने “मज़े” के लिए इस्तेमाल कर लिया।

वायरल वीडियो: शर्म की पराकाष्ठा

वीडियो में साफ दिखता है — एक युवक चिता के पास बैठा…और जलती आग से हुक्का सुलगाया। बाकी लोग? वीडियो बना रहे थे। आजकल गुनाह करने से पहले लोग सोचते नहीं…बस रिकॉर्ड बटन ऑन कर देते हैं।

गांव का गुस्सा: ‘ये गलती नहीं, अपराध है’

जैसे ही वीडियो वायरल हुआ…गांव में गुस्से की आग भड़क उठी। लोगों ने कहा — ये सिर्फ बदतमीजी नहीं…ये मृतक का अपमान है। जब समाज की संवेदनाएं मरने लगती हैं…तो ऐसे दृश्य आम हो जाते हैं।

पुलिस एक्शन: सिस्टम जागा… लेकिन देर से?

Uttar Pradesh Police ने तुरंत कार्रवाई की। एक आरोपी गिरफ्तार बाकी की तलाश जारी। थाना हाफिजपुर के प्रभारी प्रवीण कुमार ने जांच शुरू की।

सवाल ये नहीं कि गिरफ्तारी हुई… सवाल ये है कि ये सोच पैदा कैसे हुई?

System Failure: गलती सिर्फ युवकों की नहीं

ये सिर्फ कुछ लड़कों की हरकत नहीं…ये सिस्टम की चूक है। संस्कारों की शिक्षा कमजोर, सोशल मीडिया की भूख तेज और समाज की चुप्पी गहरी। जब गलत पर चुप्पी रहती है…तो अपराध “ट्रेंड” बन जाता है।

 

परिवार पर क्या गुजरी होगी?

सोचिए उस परिवार के बारे में… जो अपने बुजुर्ग को खो चुका था…और अब ये वीडियो देख रहा है। मौत का दुख अलग…अपमान का दर्द अलग।

ये घटना सिर्फ हापुड़ की नहीं है…ये पूरे समाज का सच है। हम टेक्नोलॉजी में आगे बढ़े…लेकिन इंसानियत में पीछे छूट गए।

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