
सफेद कोट, गले में स्टेथोस्कोप और चेहरे पर भरोसा—यही एक डॉक्टर की पहचान होती है। लेकिन राजस्थान में खुला यह घोटाला उस भरोसे को अंदर तक हिला देता है।
Rajasthan Police Special Operations Group की कार्रवाई ने दिखा दिया कि यहां कुछ लोग डिग्री से नहीं, पैसों से डॉक्टर बन रहे थे।
18 गिरफ्तार, 90 से ज्यादा संदिग्ध
राजस्थान में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के जरिए डॉक्टर बनने वाले गिरोह पर बड़ी कार्रवाई हुई है। Rajasthan Medical Council के पूर्व रजिस्ट्रार समेत 18 लोगों की गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में 90 से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन हासिल किया।
कैसे खुला पूरा मामला
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश एक शिकायत से शुरू हुआ। करौली में इंटर्नशिप कर रहे पीयूष त्रिवेदी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई नाम सामने आए। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, यह साफ हो गया कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है।
RMC के अंदर तक पहुंचा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि Rajasthan Medical Council के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी इस पूरे खेल में शामिल थे। वे केवल रोल नंबर की जांच कर रहे थे, जबकि बाकी दस्तावेजों को नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर फर्जी उम्मीदवारों को वैध डॉक्टर बना दिया गया।
20–25 लाख में ‘डॉक्टर’ बनने का रास्ता
इस घोटाले का पूरा मॉडल पैसों पर टिका था। हर उम्मीदवार से 20 से 25 लाख रुपये वसूले जाते थे। इसमें से करीब 11 लाख रुपये अधिकारियों तक पहुंचते थे, जबकि बाकी रकम दलालों में बांटी जाती थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि फेल हो चुके छात्रों ने पास उम्मीदवारों के रोल नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी मार्कशीट तैयार करवाई।

9 जिलों में एक साथ छापेमारी
SOG ने इस ऑपरेशन को बड़े स्तर पर अंजाम दिया। 7 SOG टीमों और 9 जिलों की पुलिस की 14 टीमों ने मिलकर जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और दिल्ली समेत कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। इससे गिरोह को संभलने का मौका नहीं मिला।
निजी अस्पतालों तक पहुंचा फर्जीवाड़ा
उदयपुर में पकड़ा गया आरोपी यश पुरोहित एक निजी अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहा था। यह मामला केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ का भी है।
आम जनता के लिए चेतावनी
इस मामले के बाद यह जरूरी हो गया है कि लोग अपने डॉक्टर की सच्चाई खुद भी जांचें। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल के जरिए डॉक्टर की वैधता की पुष्टि की जा सकती है।
यह सिर्फ एक घोटाला नहीं, भरोसे की हत्या है। जब बिना योग्यता के लोग डॉक्टर बनकर इलाज करेंगे, तो खतरा सिर्फ सिस्टम को नहीं, हर मरीज को होगा। राजस्थान का यह मामला एक चेतावनी है कि अगर निगरानी कमजोर हुई, तो जिंदगी सबसे सस्ता सौदा बन जाएगी।
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