
महाराष्ट्र में मंगलवार सुबह अचानक हलचल मच गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम से जुड़े 12 ठिकानों पर छापा मारा।
मामला सिर्फ पैसे तक सीमित नहीं—विदेशी चंदा, FCRA नियमों का उल्लंघन, मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध लोगों की मौजूदगी, सब कुछ जांच के दायरे में है।
ट्रस्ट को 2014–2024 के बीच लगभग 410 करोड़ रुपए का विदेशी फंड मिला। ये फंड कहां से आया?
बोत्सवाना, UK, कुवैत, स्विट्ज़रलैंड, मॉरीशस… और कुछ टैक्स हेवन देश!
यानी दानदाता भी इंटरनेशनल और आरोप भी इंटरनेशनल।
कैसे पकड़ा गया पूरा मामला? (The Trigger Point)
शुरुआत हुई अक्कलकुवा कैंपस में दो यमनियों के अवैध रूप से रहने की शिकायत से। उनकी गतिविधियाँ संदिग्ध लगीं—और बस!
पुलिस ने FIR की, और जांच धीरे-धीरे विदेशी फंडिंग की एक लंबी कहानी में बदल गई।
फिर पता चला— भारी विदेशी चंदा और कई बार FCRA का उल्लंघन। विदेश से मिले फंड को गैर-पंजीकृत NGOs तक पहुंचाना। इसके बाद 15 जुलाई 2024 को गृह मंत्रालय ने ट्रस्ट का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया।
क्या-क्या आरोप लगे? (The Allegations)
ED के अनुसार जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं— विदेशी फंडिंग का गलत इस्तेमाल। फर्जी मरीज / फर्जी छात्रों के आंकड़े ताकि सरकारी अनुदान और परमिशन आसानी से मिल सके।
अवैध भूमि कब्जा
आदिवासी जमीन पर “विस्तार” के नाम पर कब्जे के आरोप

संदिग्ध हॉस्पिटल ऑपरेशंस
अल-सलाम अस्पताल की गतिविधियों पर गंभीर सवाल
ED की रेड के बाद अब पूरा मामला बिल्कुल Netflix डॉक्यूमेंट्री वाला प्लॉट लग रहा है।
अब आगे क्या? (What ED Will Investigate Next)
ED अब ये जांच रही है— फंड किस बैंक अकाउंट में गया, किसने लिया, क्यों लिया कैसे खर्च किया।
कुल मिलाकर—पैसा गया कहाँ और लौटकर आया कहाँ?
FEMA और दूसरी धाराएँ भी लग सकती हैं। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड्स और दस्तावेज़ जब्त किए हैं।
जामिया इस्लामिया इशातुल उलूम क्या है?
- 1979 में स्थापित
- एक बड़ा इस्लामी वेलफेयर और एजुकेशनल नेटवर्क
- स्कूल, कॉलेज, मेडिकल/फार्मेसी कॉलेज और अस्पताल
- 15,000 से ज्यादा छात्र
ट्रस्ट शिक्षा और स्वास्थ्य में बड़ी भूमिका निभाता है, लेकिन आरोपों ने अब उसकी छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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