
नया साल, नई उम्मीदें… लेकिन दिल्ली के लिए 2026 की शुरुआत खौफनाक आंकड़ों के साथ हुई। सिर्फ 27 दिनों में 807 लोग लापता — यानी हर दिन औसतन 27 इंसान सिस्टम से आउट ऑफ नेटवर्क।
राजधानी, जो CCTV और Smart City के दावों से भरी है, आज खुद एक Missing File बनती जा रही है।
बच्चे, किशोर और वयस्क — कोई भी Safe नहीं
आंकड़े बताते हैं कि यह संकट सिर्फ एक age group तक सीमित नहीं है। वयस्क: 616 लापता, सिर्फ 181 ट्रेस। नाबालिग: 191 लापता, 48 मिले। अब भी गायब: 572 लोग।
मतलब साफ है — हर रिकवरी के पीछे कई अनसुलझी कहानियां छूट जाती हैं।
हर दिन 27 गायब, सिर्फ 9 वापस
दिल्ली पुलिस डेटा के मुताबिक, जहां औसतन 27 लोग रोज़ लापता हो रहे हैं, वहीं सिर्फ 9 लोगों को ही ट्रेस किया जा पा रहा है।
बाकी? फाइलों, कॉल रिकॉर्ड्स और इंतज़ार में अटके परिवार।
सबसे ज्यादा खतरे में Teenagers
सबसे डरावनी तस्वीर उभरती है 12–18 साल के बच्चों में 169 किशोर लापता, सिर्फ 48 ट्रेस, 121 अब भी गायब।

सवाल ये नहीं कि बच्चे क्यों गायब हो रहे हैं, सवाल ये है — उन्हें ढूंढने की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है?
2016–2026: आंकड़े बदलते रहे, डर नहीं
पिछले 10 सालों में:
- 60,694 बच्चे लापता
- 11% आज भी Untraced
हर साल नई सरकार, नए नारे…लेकिन Missing Children की फाइल वहीं की वहीं। सिस्टम अपडेट हुआ, संवेदनशीलता नहीं।
दिल्ली में अब रास्ते नहीं, रिकवरी रेट मिसिंग है। डेटा तो अपडेट होता है, लेकिन ज़िम्मेदारी हमेशा Pending रहती है।
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