Maran का बयान: ‘उत्तर भारत की लड़कियों का काम रसोई और बच्चे

संजीव पॉल
संजीव पॉल

चेन्नई सेंट्रल के चार बार के सांसद और DMK नेता दयानिधि मारन ने सरकारी महिला कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए एक विवादित बयान दिया। उन्होंने उत्तर भारतीय महिलाओं और तमिलनाडु की महिलाओं की तुलना करते हुए कहा कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि उत्तर भारत में उन्हें केवल ‘रसोई और बच्चे’ तक सीमित रखा जाता है।

भड़की BJP की प्रतिक्रिया

भाजपा नेताओं ने मारन के बयान की तीखी निंदा की। तमिलनाडु भाजपा प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा, “एक बार फिर मारन ने उत्तर भारतीयों का अपमान किया। यह अस्वीकार्य है।” भाजपा नेता अनिला सिंह ने भी कहा कि शक्ति को क्षेत्रीय सीमाओं में बांटना गलत है और यह भारतीय संस्कृति की समझ के खिलाफ है।

DMK का बचाव

दूसरी ओर, DMK ने मारन का बचाव किया। पार्टी नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु में महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के लिए हमेशा संघर्ष किया गया है, जबकि उत्तर भारत में इस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं हुए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिलाओं को मजबूत बनाने का काम राज्य सरकारों पर निर्भर करता है और कांग्रेस जहां भी शासन कर रही है, वहां महिलाओं की शिक्षा में सुधार हुआ है।

एनसीपी यूपी महासचिव कामिनी शर्मा ने कहा, “हम उत्तर भारत की महिलाओं के साहस, मेहनत और स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। यह जरूरी है कि राजनीतिक नेता ऐसी अपमानजनक टिप्पणियों से बचें। हर महिला को उसकी योग्यता और क्षमता के आधार पर सम्मान मिलना चाहिए, न कि क्षेत्रीय पूर्वाग्रह के आधार पर।”

राजनीतिक और सामाजिक असर

इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न कर दी। यह विवाद उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक राजनीति और महिलाओं की शिक्षा व अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला रहा है।

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