क्यों मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा बोले – “ये मॉडर्निटी नहीं, मज़हबी ग़फ़लत है!”

आजकल के मुसलमान सिर्फ़ बाइसेप्स और सिक्स-पैक में बिज़ी हैं, लेकिन दिल और नफ़्स की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दे रहा – यही दर्द बयां किया मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने अपने ताज़ा वीडियो बयान में। उन्होंने कहा, “तंदरुस्ती इमान का हिस्सा है, लेकिन जिम को कॉ-एड पार्टी बना देना इस्लामी तालीम नहीं!“ जिम में मिक्स्ड एक्सरसाइज़ = शरीयत की स्ट्रेचिंग? मौलाना साहब ने साफ़ कहा कि आजकल मर्द और औरतें एक ही जिम में, एक ही मशीन पर – “हां भाई, पहले आप!” स्टाइल में पसीना बहा रहे…

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खुश रहने का मंत्र: ‘जिनको मैं बुरी लगती, वो भी मुझे गुड घी नहीं लगते’

आजकल खुश रहना ऐसा स्किल बन गया है, जैसे नौकरी में Excel आना — सबको चाहिए, लेकिन आता किसी को नहीं। पर एक देसी टोटका है, जो हज़ारों साल से हमारे DNA में coded है: “जिनको मैं बुरी लगती हूं, वो भी मुझे कोई गुड घी नहीं लगते।” Translation:“If you think I’m too much, I also think you’re too little buttered!” सबको खुश करना छोड़ो, खुद से खुश रहो जैसे ही आप सबको खुश करने की कोशिश करते हैं, कोई कहेगा: “बहुत बोलती हो” कोई बोलेगा: “कम क्यों बोलती हो?”…

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पत्रकार ऋतिका सिंह — Big B को सिखाया डेटिंग का नया ‘लव-गणित’

“Kaun Banega Crorepati”? नहीं भैया — “Kaun Banega Cupid!” KBC सीजन 16 का एक एपिसोड ऐसा आया जिसने केवल ज्ञान ही नहीं, Gen Z का ‘दिल-दिमाग़’ भी खोल दिया। दिल्ली की युवा पत्रकार ऋतिका सिंह, जो पेशे से रिपोर्टर हैं और शौक से रिश्तों की डॉक्टर, जब हॉटसीट पर पहुंचीं — तो गेम से ज़्यादा चर्चा उनके ‘डेटिंग टर्म्स’ ने बटोरी! Breadcrumbing पर बिग बी की मासूमियत और ऑडियंस का ठहाका! जैसे ही ऋतिका ने कहा कि Gen Z रिलेशनशिप में Breadcrumbing आम हो गया है, अमिताभ बच्चन बोले: “Breadcrumbing…

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Cancer Vaccine ने दिखाया चमत्कार, 100% असरदार साबित हुई Entromix

कोरोना के बाद अब रूस फिर सुर्खियों में है — इस बार वजह और भी बड़ी है। “एंटरोमिक्स (Entromix)” नाम की mRNA आधारित कैंसर वैक्सीन ने ट्रायल में 100% प्रभावशीलता का दावा किया है। कहने को ये टीका है, लेकिन असल में ये उम्मीद, हिम्मत और विज्ञान का थ्री-इन-वन कॉम्बो है। “अब ट्यूमर के लिए ये टीका ‘नो एंट्री’ बोर्ड जैसा है।” क्या है Entromix और कैसे काम करता है ये वैक्सीन? यह वैक्सीन कोई जनरल डोज़ नहीं, बल्कि हर मरीज के जीन और ट्यूमर प्रोफाइल के हिसाब से कस्टमाईज़ की…

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“सिर्फ खांसी नहीं, जानलेवा हो सकता है ‘फेफड़ों में पानी भरना’!”

निमोनिया कोई छोटा मोटा ज़ुकाम नहीं है जिसे काढ़े से ठीक कर लो। ये वो बीमारी है जो आपके फेफड़ों की एयर सैक्स (एल्वियोली) में सीधा लैंड करती है और वहां पस या पानी भर देती है। इसे आम भाषा में लोग कहते हैं – “फेफड़ों में पानी भर गया।” 2019 में निमोनिया से 7.4 लाख बच्चों की मौत सिर्फ 5 साल से कम उम्र में हो गई। ये आंकड़े बताते हैं कि ये बीमारी किसी भी उम्र के लिए मज़ाक नहीं है। बच्चों और बुज़ुर्गों की जान के लिए…

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मिजोरम में हर पांचवां पुरुष कैंसर का शिकार? पढ़िए चौंकाने वाला अध्ययन!

पहले लोग कहते थे कि कैंसर अमीरों की बीमारी है, क्योंकि सिर्फ वही जांच और इलाज करवा सकते हैं। लेकिन आज हालात ये हैं कि गरीब, अमीर, शहरी, ग्रामीण, पहाड़ी और मैदानी — सब बराबरी से चपेट में हैं। हाल ही में आए एक अध्ययन ने साफ कर दिया है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में कैंसर की दर बाक़ी राज्यों से कहीं ज़्यादा है। और सबसे चौंकाने वाली बात? मिजोरम में हर 5 में से 1 पुरुष को जीवन में कैंसर होने की संभावना है।मतलब अब “Cancer is rare”…

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क्यों मनाते हैं 5 सितंबर को शिक्षक दिवस? जानें कहानी, किस्सा और कनेक्शन

हर साल जब स्कूलों में बच्चे ‘Happy Teachers Day’ बोलकर पेन-फूल थमाते हैं, तो बहुतों को नहीं पता होता कि इस दिन की शुरुआत एक बर्थडे पार्टी रिजेक्ट होने से हुई थी।जी हां! डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनके छात्र उनके जन्मदिन पर कुछ केक-फूल-वाला सेलिब्रेशन देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने कहा – “Cake नहीं, chalk पकड़ाओ। मेरा जन्मदिन नहीं, शिक्षक दिवस मनाओ!” और बस वहीं से शुरू हुआ Teacher’s Day – एक ऐसा दिन जिसमें बच्चे शिक्षक को फूल देते हैं और शिक्षक बदले में उन्हें होमवर्क! कौन थे डॉ.…

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“सर्दी-ज़ुकाम में डॉक्टर नहीं, गूगल से इलाज? संभल जाओ दोस्त!”

मौसम बदला नहीं कि सर्दी-ज़ुकाम दस्तक दे देता है। खासकर बरसात के सीज़न में जब एक दिन बारिश, अगले दिन तेज धूप — शरीर भी कन्फ्यूज़, और इम्यूनिटी भी ढीली! इसी बेचैनी में लोग झट से मेडिकल स्टोर से दवा ले आते हैं — बिना डॉक्टर की सलाह के। यहीं से शुरू होती है “सेल्फ-मेडिकेशन” की वो कहानी, जिसका अंत बीमार शरीर और बेअसर दवाओं पर होता है। “हर बार दवा ज़रूरी नहीं होती, और हर दवा हर मर्ज़ पर नहीं चलती। “ 1. गलत बीमारी पर गलत दवा सर्दी-ज़ुकाम…

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इंसुलिन रेसिस्टेंस: वजन बढ़ाओ, बीमारी पाओ? जानिए बचाव के आसान तरीके

“मैं तो सिर्फ पिज़्ज़ा खाता हूं, लेकिन थकावट हर समय रहती है!” अगर ये लाइन आपकी डेली डायरी का हिस्सा है, तो इंसुलिन रेसिस्टेंस आपके दरवाजे पर खड़ा है – डोरबेल बजा के नहीं, सीधा घुसकर! आज की लाइफस्टाइल – जिसमें उठते ही फोन, बैठते ही स्नैक्स, और सोते वक्त इंस्टाग्राम रील्स – ने हमारी बॉडी को “जलेबी मोड” पर डाल दिया है। बाहर से गोल-मटोल और अंदर से उलझा हुआ। इंसुलिन रेसिस्टेंस क्या बला है? इंसुलिन शरीर का वो “सीरियस कर्मचारी” है जो ब्लड शुगर को खींचकर कोशिकाओं तक पहुंचाता…

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ट्राइग्लिसराइड्स: आहार और लाइफस्टाइल से पाएं दिल को सुरक्षा

ट्राइग्लिसराइड्स एक प्रकार की वसा (Fat) हैं जो शरीर में ऊर्जा के रूप में स्टोर होती हैं। ये तभी खतरनाक होती हैं जब इनका स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है। बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड्स दिल से जुड़ी बीमारियों, स्ट्रोक, फैटी लिवर और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। ट्राइग्लिसराइड्स क्यों बढ़ते हैं? ये आदतें बना सकती हैं दिल का मामला भारी: मीठा ज़्यादा: ज्यादा शुगर और रिफाइंड कार्ब्स लेना तली-भुनी चीज़ें: खासतौर पर ट्रांस फैट्स वाली शराब का सेवन ओवरवेट या मोटापा फिज़िकल एक्टिविटी की कमी नींद और…

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