हीरो नहीं, जिम्मेदार इंसान बनो बेटा!

कभी कहा जाता था “बेटी को संभालकर रखो”, अब समझदार लोग कहते हैं “बेटे को समझदार बनाओ।” समाज evolve हो रहा है। ऐसे में एक पिता की भूमिका सिर्फ कमाने वाले की नहीं, बल्कि character builder की भी है। बेटे को यह सिखाना जरूरी है कि ताकत का मतलब दबाना नहीं, संभालना होता है। 1. Respect is the Real Power सबसे पहली नसीहत Respect सबके लिए। चाहे दोस्त हो, सहपाठी हो, colleague हो या partner। Consent क्या होता है, boundaries क्या होती हैं ये बातें घर से ही शुरू होती हैं। हीरो वही…

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“Red Rose आगे बढ़ो! Valentine’s Day को बनाओ Truly Unforgettable”

Valentine’s Day सिर्फ 14 फरवरी की तारीख नहीं, बल्कि emotions का reminder है। रोजमर्रा की भागदौड़ में जो “I Love You” धीरे हो जाता है, इस दिन उसे loud और clear करने का मौका मिलता है। यादगार Valentine वही है जिसमें खर्च कम और feelings ज़्यादा हों। Personalized Surprise – Copy नहीं, Creativity Market में gift options की भरमार है, लेकिन सबसे impactful वही होता है जो दिल से निकले। Handwritten note, memory scrapbook, या पहली मुलाकात वाली जगह पर छोटा सा revisit ये gestures years तक याद रहते हैं।…

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Body दे रही है Warning? Stress के ये Signs बिल्कुल Ignore न करें

तनाव या Tension को हम अक्सर “दिमाग की बात” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि stress हमारे सोचने, समझने, महसूस करने और बर्ताव करने के तरीके को quietly hijack कर लेता है। कई बार शरीर पहले signal देता है, और दिमाग बाद में समझ पाता है कि “अरे… ये बीमारी नहीं, टेंशन है!” खतरनाक टेंशन के लक्षण (Tanav Ke Lakshan) अगर ये symptoms बार-बार दिखें, तो समझ जाइए body help मांग रही है- हाथ-पैर अचानक ठंडे पड़ जाना। शरीर में अजीब सा खिंचाव या बेचैनी। मुंह…

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Gold नहीं Gold Flake के रेट ने बिगाड़ दिया Budget! धुआँधार दर्द

गोल्ड के रेट बढ़े तो न्यूज़ चैनल चिल्लाते हैं, शादी वाले माथा पकड़ लेते हैं और आम आदमी कहता है—“ठीक है, अगली पीढ़ी खरीदेगी।” लेकिन साहेब… Gold Flake के रेट बढ़ गए तो सीधा दिल पर हमला होता है। अब फिक्र को अगर धुएँ में उड़ाया, तो घर का बजट राख हो जाएगा महंगाई का असली टेस्ट यहीं होता है सोने का भाव बढ़े—तो चर्चा। पेट्रोल महंगा—तो बहस। लेकिन जब सिगरेट के दाम बढ़ते हैं न, तब आदमी खुद से सवाल करता है “आज टेंशन ज्यादा है या जेब पतली?”…

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“थाली में रोज वही रोटी-चावल? बीमारी का RSVP तो नहीं दे रहे आप!”

भारतीय थाली में अगर कोई चीज़ “Permanent Member” है, तो वो है रोटी या चावल. सब्ज़ी बदल सकती है, दाल बदल सकती है, लेकिन अनाज वही रहता है. हमने मान लिया है कि जो रोज खा रहे हैं, वही सबसे सेफ है — लेकिन क्या सच में? Nutrition expert Dr. Shalini Singh Solanki का कहना है कि रोजाना सिर्फ गेहूं की रोटी या सफेद चावल पर निर्भर रहना शरीर के लिए धीरे-धीरे नुकसानदायक हो सकता है. और सबसे बड़ी बात — हमें इसका एहसास तब होता है, जब बीमारी दस्तक…

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लंच के बाद आंखें भारी? कहीं आपका शरीर SOS तो नहीं भेज रहा!

दोपहर का खाना खत्म… और 10 मिनट में आंखें भारी, दिमाग स्लो, स्क्रीन धुंधली! यह समस्या खासकर ऑफिस वर्किंग प्रोफेशनल्स में बहुत आम है। घर पर हों तो झपकी ले ली जाती है, लेकिन ऑफिस में यही नींद प्रोडक्टिविटी का दुश्मन बन जाती है। जब आप खाना खाते हैं— पाचन के लिए ज्यादा खून पेट की ओर चला जाता है। ब्रेन को मिलने वाला ब्लड फ्लो थोड़ा कम हो जाता है। ब्लड शुगर में हल्का उतार-चढ़ाव होता है। नतीजा? दिमाग रिलैक्स मोड में। शरीर कहता है – “अब थोड़ा आराम हो…

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जनवरी में जोश, फरवरी में धोखा? 2026 में Weight Loss ऐसे रहेगा ऑन ट्रैक

हर नए साल की तरह 2026 की शुरुआत भी एक ही लाइन से होती है— “इस साल तो weight कम करके ही रहेंगे।” Gym membership ली जाती है, diet chart WhatsApp पर घूमता है और motivation reels saved रहती हैं। लेकिन जैसे ही जनवरी कैलेंडर पलटता है, संकल्प भी quietly archive हो जाता है। समस्या willpower की नहीं है, problem है unrealistic planning की। अगर आप चाहते हैं कि 2026 में आपका weight loss resolution सिर्फ़ wish न रहे, बल्कि visible result बने—तो approach बदलनी होगी। Big Goals नहीं, Smart…

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Best Friend को I Love You कहना पाप कब से हो गया?

एक लड़की अगर अपने male best friend को और एक लड़का अपनी female best friend को सादगी से कह दे — “I love you” तो अचानक माहौल ऐसा बन जाता है जैसे कोई FIR दर्ज हो गई हो। नाक सिकुड़ जाती है, भौंहें तन जाती हैं और जजमेंट की कुर्सी पर पूरा समाज बैठ जाता है। सवाल सीधा है — प्यार बोलना कब से संदिग्ध हरकत बन गया? Love ka Matlab: Romance नहीं, Respect भी होता है हमने “Love” शब्द को इतना narrow कर दिया है कि उसका मतलब सिर्फ अफेयर,…

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हर बात पर आँसू, हर किसी पर दोष—शास्त्र भी परेशान, साइकोलॉजी भी!

सोशल मीडिया और घरेलू बहसों में इन दिनों एक सवाल ट्रेंड कर रहा है—हर बात पर रोने और हर हाल में दूसरों को कोसने वाली स्त्री को शास्त्रों और मनोविज्ञान में क्या कहा गया है?यह सवाल सिर्फ व्यंग्य नहीं, बल्कि व्यवहारिक अध्ययन और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। शास्त्र क्या कहते हैं? (Scriptural Perspective) शास्त्र किसी स्त्री जाति को नहीं, बल्कि वृत्ति (Behavioral Trait) को नाम देते हैं। मनुस्मृति से भावार्थ “असंतोषोऽधर्ममूलं, दोषदर्शी न शान्तिभाक्।” जो व्यक्ति सदैव असंतुष्ट रहता है और दोष ही खोजता है, वह स्वयं कभी…

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Resolution नहीं निभता? ये Health Hacks हर महिला को बचा सकते हैं!

नया साल सिर्फ कैलेंडर बदलने का नहीं, खुद को प्राथमिकता देने का मौका भी होता है। अगर महिलाएं ये 5 काम नियमित कर लें, तो न सिर्फ शरीर बल्कि Mind और Hormones भी Thank You कहेंगे। “महिलाएं सबका ख्याल रखती हैं, पर खुद को भूल जाती हैं — यही सबसे बड़ा Health Risk है।” Strength Training: सिर्फ Weight Loss नहीं, Bone Insurance है अगर आपको लगता है कि जिम सिर्फ जवान लड़कियों के लिए है, तो Menopause Reality Check जरूरी है।Strength training से: Bones strong Muscles toned Hormonal balance बेहतर…

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