नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की 64 सदस्यीय टीम में अनुभव, युवा नेतृत्व, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को साथ साधने की कोशिश दिखाई दे रही है। नई टीम में तीन पूर्व मुख्यमंत्री, 18 सांसद और 10 महिला नेताओं को जगह दी गई है।
पार्टी की यह राष्ट्रीय टीम देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है। बीजेपी की कोशिश संगठन में देश के अलग-अलग हिस्सों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की है, ताकि कश्मीर से कन्याकुमारी और पूर्वोत्तर तक संगठन की पहुंच मजबूत बनी रहे।
पूर्वोत्तर और आदिवासी वोट पर भी बीजेपी का फोकस
नई राष्ट्रीय टीम में पूर्वोत्तर को खास महत्व दिया गया है। त्रिपुरा, असम और नागालैंड से एक-एक नेता को शामिल किया गया है। इसके अलावा डॉक्टर संबित पात्रा के नेतृत्व में काम करने वाला नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेशन सेल पहले की तरह सक्रिय रहेगा।
आदिवासी समुदाय को साधने के लिए मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर से चार प्रमुख नेताओं को टीम में जगह दी गई है। इनमें दो महिला नेता शामिल हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश से दलित समुदाय के तीन प्रमुख चेहरों को भी राष्ट्रीय टीम में जिम्मेदारी दी गई है।
10 महिला नेताओं के साथ सभी प्रमुख समुदायों को प्रतिनिधित्व
बीजेपी ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची में 10 अनुभवी महिला नेताओं को शामिल किया है। इसे संगठन में महिला नेतृत्व को बढ़ाने के साथ महिला मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी टीम में विविधता दिखाई देती है। इसमें एक सिख, दो ईसाई, एक मुस्लिम, एक जैन और एक पारसी समुदाय के नेता को जगह दी गई है।
तीन पूर्व CM और चार पूर्व केंद्रीय मंत्रियों का अनुभव
नई टीम में सरकार चलाने और संगठन संभालने का अनुभव रखने वाले नेताओं को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव जैसे अनुभवी नेताओं को फ्रंटलाइन में रखा गया है।
इसके अलावा केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके चार पूर्व मंत्रियों और एक मौजूदा केंद्रीय मंत्री को भी संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने इस तरह अनुभव और संगठनात्मक सक्रियता के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर और वकील भी टीम का हिस्सा
बीजेपी की नई टीम में राजनीतिक अनुभव के साथ पेशेवर पृष्ठभूमि वाले लोगों को भी जगह मिली है। इसमें चार प्रैक्टिसिंग डॉक्टर, दो प्रोफेसर, कई पीएचडी धारक, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकील शामिल हैं।
पार्टी की कोशिश ऐसे पेशेवर चेहरों के जरिए नीतिगत मुद्दों पर अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाले अनुभव और जमीनी फीडबैक को संगठन तक पहुंचाने की है।
पुराने चेहरों की वापसी, युवाओं को भी मौका
वसुंधरा राजे, राम माधव और स्मृति ईरानी जैसे पुराने चेहरों की वापसी को पार्टी में अनुभव और निरंतरता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर युवा नेताओं और नई पीढ़ी के चेहरों को भी टीम में शामिल किया गया है।
बीजेपी की रणनीति पुराने सामाजिक और राजनीतिक आधार को बनाए रखते हुए युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की है। महिला नेताओं की भागीदारी भी इसी व्यापक संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
सोशल मीडिया की कमान में भी बदलाव
बीजेपी ने डिजिटल मोर्चे पर भी बदलाव किया है। करीब 10 साल तक पार्टी का आईटी सेल संभालने वाले अमित मालवीय से सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी लेकर दीपक म्हस्के को यह दायित्व दिया गया है।
महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा से चार सोशल मीडिया सह-संयोजक भी नियुक्त किए गए हैं। इससे पार्टी की क्षेत्रीय और अलग-अलग मंचों के लिए तैयार होने वाली सामग्री पर फोकस बढ़ाने का संकेत मिलता है।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सोशल मीडिया बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा रहा था। अब 2029 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीपफेक और नए डिजिटल मंचों का प्रभाव और बढ़ने की संभावना को देखते हुए पार्टी ने डिजिटल टीम में बदलाव किया है।
जातीय समीकरण साधने की भी कोशिश
बीजेपी की नई टीम में लाल सिंह आर्य को अनुसूचित जाति मोर्चा, तारिक मंसूर को अल्पसंख्यक और गजेंद्र पटेल को अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े मोर्चे में जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपना आधार मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
विपक्ष की जातिगत राजनीति के मुकाबले बीजेपी सामाजिक प्रतिनिधित्व और अलग-अलग समुदायों के चेहरों को संगठन में आगे रखकर व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करना चाहती है।
2027 के विधानसभा चुनावों से बनेगा 2029 का रास्ता
2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 10 से अधिक राज्यों के विधानसभा चुनावों को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले अहम पड़ाव माना जा रहा है। ऐसे में नई राष्ट्रीय टीम में राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना पार्टी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राजस्थान से वसुंधरा राजे, पंजाब से मनप्रीत सिंह बादल और उत्तर प्रदेश से तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ गुजरात और दिल्ली के स्थानीय नेताओं को भी जिम्मेदारियां दी गई हैं, ताकि इन राज्यों में संगठन की पकड़ मजबूत रखी जा सके।
बीजेपी की नई टीम से उसका संदेश साफ है—2029 की तैयारी केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि संगठन के स्तर पर अभी से शुरू की जा रही है। पार्टी अनुभव, युवा नेतृत्व, महिला भागीदारी और सामाजिक प्रतिनिधित्व को साथ लेकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
