
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, इसके संकेत अब पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि खुलेआम दिखने लगे हैं।
पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पटना आवास पर आयोजित लिट्टी-चोखा भोज से तीन विधायकों की गैरहाजिरी और उसी दौरान उनका BJP नेता से मिलना, सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
पटना में हुई थी ‘लिट्टी-चोखा पार्टी’
Unity Show या Warning Signal? बुधवार शाम राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पटना आवास पर पारंपरिक लिट्टी-चोखा भोज का आयोजन किया था। यह कार्यक्रम संगठनात्मक एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा था।
पार्टी के ज्यादातर विधायक और कई राजनीतिक चेहरे मौजूद रहे, लेकिन आलोक सिंह, रामेश्वर महतो और माधव आनंद इस भोज से पूरी तरह नदारद रहे।
शुरुआत में इसे सामान्य गैरमौजूदगी माना गया, लेकिन अगले दिन सामने आई तस्वीरों ने कहानी बदल दी।
भोज से दूरी, BJP से नजदीकी
सिर्फ इत्तेफाक या सोची-समझी चाल? 24 दिसंबर की रात, जब पटना में RLM का भोज चल रहा था, उसी वक्त ये तीनों विधायक BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात कर रहे थे।
यह मुलाकात अचानक नहीं लगती। पूरी तरह Planned दिखाई देती है। और Timing ने इसे और संदिग्ध बना दिया। राजनीति में टाइमिंग ही सबसे बड़ा बयान होती है।
सोशल मीडिया ने बढ़ाया बवाल
Facebook और X बने सबूत। इस मुलाकात की तस्वीर खुद रामेश्वर महतो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की।
तस्वीर में:
- दाईं ओर: रामेश्वर महतो
- बाईं ओर: माधव आनंद
- पीछे: आलोक सिंह
- बीच में: BJP नेता नितिन नबीन
इसके बाद माधव आनंद के Facebook पोस्ट्स ने साफ कर दिया कि तीनों विधायक उस वक्त दिल्ली में थे। यानी पटना में लिट्टी-चोखा-दिल्ली में राजनीतिक चर्चा।

RLM में असहजता के साफ संकेत
पुरानी शिकायतें, नया संकट। सूत्रों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब RLM में अंदरुनी असंतोष सामने आया हो। पहले भी बिना चुनाव लड़े बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने पर। परिवारवाद के आरोप लगे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इस्तीफा दिया। संगठनात्मक फैसलों पर असहमति खुलकर दिखी। अब विधायकों का अपने ही पार्टी कार्यक्रम से दूरी बनाना और BJP से करीबी, संभावित टूट की ओर इशारा कर रहा है।
उपेंद्र कुशवाहा के लिए बढ़ी चुनौती
Existence vs Alliance Politics उपेंद्र कुशवाहा पहले ही बिहार की राजनीति में कई बार दल-बदल, गठबंधन और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर चुके हैं।
अगर RLM के विधायक BJP की ओर झुकते हैं, तो पार्टी की संख्या, राजनीतिक प्रभाव और Negotiating Power तीनों पर सीधा असर पड़ेगा।
फिलहाल चुप्पी, लेकिन संकेत तेज
बड़ा खेल आने वाला? अभी तक- न विधायकों की ओर से न RLM नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
लेकिन तस्वीरें, टाइमिंग। मुलाकात। सब मिलकर एक ही कहानी कह रहे हैं — बिहार की राजनीति में जल्द कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है।
बिहार में अब सवाल ये नहीं है कि “लिट्टी-चोखा कौन खा रहा है?”
बल्कि ये है — “किसकी थाली बदल रही है?”
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