
अबे नेताजी चाहे ‘विकास’ के तिलक लगावसु, ‘सुशासन’ के चंदन चुपड़सु – वोट त ऊ जातिए के मिलेला जवन “गिनती में भारी” होखे। अऊ एही गिनती के पक्का सबूत बनाके लइलन नीतीश बाबू – जातीय सर्वे 2023।
ई सर्वे में निकल के अइल कि बिहार में अतिपिछड़ा लोग सबसे बेसी बा (36.01%)। अब वोट के खेल में जहवाँ संख्या होला, ओहिजे सत्ता के सेंटर होला।
1994 से 2025 तक: नीतीश बाबू के जातीय महायुद्ध
राजनीति में सब कुछ मिलावटी हो सकेला, बाकिर जाति त ऑरिजिनल ह। 1994 में लालू यादव जब अतिपिछड़ा के कोटा खत्म करे के सोचे लगले, तब नीतीश बाबू उहिजा से अलग हो गइलन।
लालू जी यादववाद के पिच पर खेलत रहलन, नीतीश बाबू गैर-यादव पिछड़ा आ खासकर अतिपिछड़ा जातियन के झंडा उठवले।
जात देख के टिकट, वोट देख के सरकार
2020 विधानसभा चुनाव में:
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जदयू के 17 में से 12 अतिपिछड़ा उम्मीदवार जीतलन
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राजद के 19 में से खाली 4 के सफलता मिलल
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भाजपा के भी 4 अतिपिछड़ा विधायक चुन के अइलन।
ई साबित करेल कि अतिपिछड़ा वोट बैंक बिना, केहू के सरकार का सपना अधूरा बा।
नीतीश बनाम तेजस्वी: अब जातिवादी शतरंज चालू बा
नीतीश कुमार:
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जातीय सर्वे से सामाजिक न्याय के चाभी पकड़ लिहलन

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अतिपिछड़ा आयोग बना के ‘आधा राजा’ बन गइलन
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सर्वे के रिपोर्ट से अतिपिछड़ा में confidence injection मार दिहलन
तेजस्वी यादव:
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जगदानंद के हटाके मंगनीलाल मंडल (पिछड़ा) के बनवले अध्यक्ष
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तेली समाज खातिर रैली, “अतिपिछड़ा जगाओ, तेजस्वी लाओ” के नारा
मतलब RJD अब नीतीश के इलाज़ खोजे में लगल बा।
“नेता लोग अब अतिपिछड़ा के ना समझे के भूल करीं, त ऊ लोग सियासत से झाड़ू लागा दी! जात देख के नोटा भी दबा सकेला अब त!”
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव अब जात के मेला ना, जात के अखाड़ा होखी। और ई अखाड़ा में अतिपिछड़ा वर्ग बनल बा रिंग मास्टर। जातीय सर्वे से नीतीश कुमार किंगमेकर से सीधे राजा बन सकेलें, लेकिन तेजस्वी भी खेला कर रहल बा।
बाकी केहू ना बूझल कि जादू के छड़ी किसके हाथ में होई… बाकिर अतिपिछड़ा के वोट, अब मजाक ना ह।
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