कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी Mamata Banerjee की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री Arup Biswas ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस के बैंक खाते के संचालन पर रोक लगाने की मांग की है। यह कदम पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया है।
फंड के दुरुपयोग की जताई आशंका
बताया जा रहा है कि अरूप बिश्वास ने बैंक को लिखे पत्र में कहा है कि पार्टी के भीतर कई गुट खुद को वैध नेतृत्व और अधिकृत पदाधिकारी बता रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट नहीं है कि खाते के संचालन का अधिकार किसके पास है। उन्होंने आशंका जताई कि अनधिकृत लोग पार्टी फंड का दुरुपयोग कर सकते हैं या पहले से हस्ताक्षरित चेकों का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
पार्टी में बगावत ने बढ़ाई परेशानी
सूत्रों के मुताबिक, Ritabrata Banerjee के नेतृत्व में 58 विधायकों ने अलग गुट बनाकर विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता प्राप्त कर ली है। वहीं, संसद में भी 20 बागी सांसद अलग होकर एक नए संगठन की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी के अधिकार और वित्तीय नियंत्रण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
कोषाध्यक्ष पद को लेकर भी विवाद
तृणमूल कांग्रेस ने 5 जून को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए अरूप बिश्वास की जगह Shubhashis Chakraborty को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था। हालांकि, अरूप ने बैंक को पत्र पुराने कोषाध्यक्ष के रूप में लिखा है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
खाते में बताए जा रहे हैं 675 करोड़ रुपये
चुनाव आयोग को सौंपे गए ऑडिट दस्तावेजों के अनुसार, पार्टी के बैंक खाते में लगभग 675 करोड़ रुपये जमा हैं। यही वजह है कि खाते के संचालन को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
मेसी कार्यक्रम मामले में भी घिरे अरूप
इसी बीच, अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार Lionel Messi के कार्यक्रम में कथित अव्यवस्था से जुड़े मामले में अरूप बिश्वास गुरुवार को पुलिस पूछताछ के लिए थाने पहुंचे। उनसे करीब साढ़े तीन घंटे पूछताछ की गई और 22 जून को फिर उपस्थित होने को कहा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अंदर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर बढ़ता विवाद आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
