“वस्त्र से नहीं, विचार से योगी” — अखिलेश का वार, सियासत में फिर तल्खी!

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर तीखा प्रहार किया।

उनका निशाना सिर्फ नीतियों पर नहीं था, बल्कि योग और संन्यास जैसे प्रतीकों की राजनीतिक व्याख्या पर भी था। अखिलेश ने कहा, “केवल वस्त्र धारण करने से कोई योगी नहीं बन जाता।”

उन्होंने गीता और गुरु नानक के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि सच्चा योगी वही है जो माया में रहते हुए भी उससे ऊपर उठे और दूसरों के दुख को अपना दुख समझे। यह बयान आध्यात्मिक बहस से ज्यादा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

“जब शिखा का अपमान हुआ…”

अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से जुड़े कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब शिखा पकड़कर अपमान किया गया, तब सत्ता पक्ष के लोग कहां थे? उनका तर्क था कि अगर समर्थन दिखाना था, तो धरने के समय संगम तट पर खड़े होना चाहिए था।

यह बयान सीधे तौर पर सरकार की संवेदनशीलता और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।

आरोप, मुकदमे और राजनीतिक मर्यादा

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों को लेकर भी सपा प्रमुख ने सरकार को घेरा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कभी Rambhadracharya से जुड़े पुराने मुकदमे को उन्होंने वापस लिया था।

उनका कहना था कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन चरित्र हनन की राजनीति स्वीकार्य नहीं हो सकती। राजनीतिक हलकों में इसे 2027 के चुनावी संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

जापान दौरे पर सटायर

मुख्यमंत्री के प्रस्तावित जापान दौरे पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश ने तंज कसा कि वे जापान जा रहे हैं, लेकिन क्योटो नहीं जा रहे। उनका इशारा विकास मॉडल की तुलना की ओर था। उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा से पहले यह सोचना चाहिए कि पिछले दस वर्षों में क्या वादे पूरे हुए और क्या अधूरे रह गए।

यह बयान सीधे तौर पर “डबल इंजन” विकास मॉडल पर सवाल की तरह पेश किया जा रहा है।

स्वास्थ्य व्यवस्था और गोरखपुर

गोरखपुर की स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि वहां इलाज से ज्यादा “गोरखधंधा” चल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होता, तो कई घटनाएं टाली जा सकती थीं। साथ ही, गोशाला प्रबंधन को लेकर भी उन्होंने भाजपा पर दिखावटी राजनीति का आरोप लगाया।

PDA कार्ड और राजनीतिक संकेत

अखिलेश यादव ने दावा किया कि जितना उत्पीड़न बढ़ेगा, उतना ही पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मजबूत होगा। सियासत में यह बयान सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि रणनीति की झलक देता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब बहस “विकास बनाम विमर्श” के बीच तेज होती दिख रही है।

राजनीति में प्रतीक अक्सर शब्दों से ज्यादा असर डालते हैं। कभी भगवा, कभी गेरुआ, कभी विकास, कभी विदेश यात्रा। लेकिन असली सवाल वही है क्या जनता प्रतीकों से प्रभावित होगी, या परिणामों से?

उत्तर प्रदेश की सियासत में फिलहाल बहस गर्म है, और बयानबाजी अपने चरम पर।

सवर्ण समाज प्रदर्शन से शहर जाम, बोर्ड परीक्षार्थी सबसे ज्यादा परेशान

Related posts

Leave a Comment