लखनऊ: आयकर विभाग के आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण प्रकोष्ठ (I&CI), लखनऊ ने वित्तीय लेन-देन की सही और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। 16 अक्टूबर 2026 को आयकर भवन, 5 अशोक मार्ग, लखनऊ में हुए इस कार्यक्रम में निर्धारित वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग और कर नियमों के अनुपालन पर जोर दिया गया। विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष किए गए स्थल सत्यापन के दौरान हजारों ऐसे लेन-देन सामने आए, जिनकी रिपोर्टिंग नहीं की गई थी या जिनकी जानकारी में त्रुटियां थीं।
SFT रिपोर्टिंग पर आयकर विभाग की विशेष नजर
आयकर विभाग का I&CI प्रकोष्ठ निर्दिष्ट वित्तीय लेन-देन (SFT) की समय पर और सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसका उद्देश्य कर व्यवस्था के दायरे को बढ़ाना और वित्तीय गतिविधियों से संबंधित जानकारी विभाग तक पहुंचाना है।
विभाग के प्रमुख निगरानी वाले लेन-देन में बैंक खातों में नकदी जमा और निकासी से संबंधित SFT-03 एवं SFT-04, सावधि जमा से जुड़ा SFT-05, 10 लाख रुपये से अधिक की शेयर आवेदन राशि से संबंधित SFT-08, 45 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़ा SFT-12 और 2 लाख रुपये से अधिक मूल्य के माल की खरीद-बिक्री से संबंधित SFT-13 शामिल हैं।
46 स्थल सत्यापन में सामने आए हजारों लेन-देन
विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष I&CI, लखनऊ ने 46 स्थल सत्यापन किए। इन जांचों के दौरान 4,311 ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए, जिनकी रिपोर्टिंग नहीं की गई थी। इनका कुल मूल्य 2,747.5 करोड़ रुपये बताया गया है। इनमें से 1,714 लेन-देन, जिनकी कुल राशि 1,160.75 करोड़ रुपये थी, बाद में विधिवत रिपोर्ट किए गए।
इसके अलावा, सत्यापन के दौरान 26,628 त्रुटिपूर्ण लेन-देन पाए गए, जिनका कुल मूल्य 14,414.82 करोड़ रुपये था। विभाग के मुताबिक, इनमें से 17,487 लेन-देन से संबंधित जानकारी को संशोधित कर सही किया गया। इन संशोधित लेन-देन का कुल मूल्य 9,293.06 करोड़ रुपये बताया गया है।
बैंकों में ब्याज की रिपोर्टिंग में भी मिली गड़बड़ी
आयकर विभाग के अनुसार, स्थल सत्यापन के दौरान कुछ बैंकों में ग्राहकों को दिए गए ब्याज की SFT रिपोर्टिंग नहीं किए जाने का मामला भी सामने आया। विभाग ने बताया कि सत्यापन के बाद संबंधित ब्याज की रिपोर्टिंग कर दी गई।
विभाग का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की सही जानकारी उपलब्ध होने से कर संबंधी अनुपालन को बेहतर बनाने और कर अपवंचन की पहचान करने में मदद मिलती है।
अचल संपत्ति के पंजीकरण में PAN का उल्लेख अनिवार्य
विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, I&CI, लखनऊ के प्रयासों के बाद प्रदेश में अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री के पंजीकरण में स्थायी खाता संख्या (PAN) का उल्लेख अनिवार्य कर दिया गया है। इस व्यवस्था से संपत्ति से जुड़े लेन-देन की पहचान और उनकी रिपोर्टिंग को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विभाग के अनुसार, यह कदम कर आधार का विस्तार करने और कर अपवंचन पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
इन अधिकारियों के नेतृत्व में हुआ अभियान
इस कार्य में I&CI, लखनऊ के निदेशक एस.एच. उस्मानी और संयुक्त निदेशक सोनल सिंह के नेतृत्व का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही उप निदेशक संदीप सिंह, आयकर अधिकारी राकेश कुमार वर्मा और आयकर अधिकारी (मुख्यालय) अभिषेक वर्मा का भी योगदान बताया गया है।
आयकर विभाग के इस आउटरीच कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और संबंधित संस्थाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर सही जानकारी प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
