नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन के प्रदर्शनों को प्रभावी बनाने के लिए राहुल गांधी ने खुद मोर्चा संभाला। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की सूची तैयार कराई, सहयोगी दलों के नेताओं से सीधे संपर्क किया और छात्र संगठनों व नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी साथ जोड़ने की पहल की। पार्टी नेताओं का दावा है कि इस रणनीति से विपक्षी दलों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और प्रदर्शनों में भागीदारी बढ़ी।
SIR और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर तेज हुई मुहिम
कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), निर्वाचन आयोग में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, हालिया खुलासों के बाद पार्टी के भीतर भी इन मुद्दों पर राहुल गांधी के सवालों को लेकर समर्थन बढ़ा है।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं के बीच हुई बातचीत के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, विपक्ष की इस मुहिम को व्यापक बनाने के लिए संगठनात्मक तैयारियों के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी लगातार संपर्क साधा गया।
राहुल गांधी ने गैरहाजिर सांसदों की सूची बनवाई
कांग्रेस से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, राहुल गांधी अपनी कोर टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इस टीम में प्रियंका गांधी वाड्रा, श्रीवत्स, अलंकार सवाई, केबी बायजू और केसी वेणुगोपाल शामिल थे। टीम में अलग-अलग नेताओं की जिम्मेदारियां संचार, रणनीति, संगठन और समन्वय से जुड़ी थीं।
प्रदर्शनों के शुरुआती चरण में INDIA गठबंधन के सांसदों ने निर्वाचन आयोग के मुख्यालय और राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इसके बाद राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले कांग्रेस सांसदों की सूची तैयार करने को कहा।
कांग्रेस के एक सूत्र का दावा है कि जब सांसदों को पता चला कि राहुल गांधी खुद उनकी मौजूदगी पर नजर रख रहे हैं, तो प्रदर्शनों में उनकी भागीदारी बढ़ने लगी। पार्टी में पहले भी कुछ वरिष्ठ सांसदों के केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और जमीनी कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने को लेकर शिकायतें उठती रही थीं।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने पार्टी नेताओं को समय पर पहुंचने का संदेश दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, नेताओं से कहा गया कि वे पुलिस की ओर से हिरासत में लिए जाने की आशंका का हवाला देने के बजाय प्रदर्शन में अपनी मौजूदगी सुनिश्चित करें।
कार्यकर्ताओं को दिल्ली लाने और ठहराने के इंतजाम
प्रदर्शन में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर भी तैयारियां कीं। रविवार रात कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए पार्टी का अकबर रोड स्थित कार्यालय खोल दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। राज्य के कांग्रेस नेताओं भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने उनके ठहरने की व्यवस्था में मदद की। उत्तर प्रदेश के सांसदों ने भी इसी तरह सहयोग किया।
इससे पहले केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा और जयराम रमेश ने विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से संपर्क कर उन्हें दिल्ली पहुंचने के लिए कहा था। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के दो वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, उन्हें अपने राज्यों में चल रहे कामकाज के बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आने को कहा गया था।
सहयोगी दलों को साथ लाने के लिए राहुल ने खुद किए फोन
INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी राहुल गांधी की रणनीति का अहम हिस्सा रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और माकपा के एमए बेबी समेत कई नेताओं से सीधे संपर्क किया।
इस पहल के पीछे सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश भी थी। पहले राहुल गांधी के राजनीतिक बयानों और संदेशों को लेकर गठबंधन के कुछ सहयोगियों के साथ मतभेद सामने आते रहे थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग की ओर मार्च के दौरान राहुल और प्रियंका गांधी की प्रमुखता को लेकर समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई थी। आकाशवाणी भवन में धरने की जानकारी सहयोगी दलों को पर्याप्त रूप से नहीं दिए जाने की शिकायत भी सामने आई थी।
इसके बाद जब समाजवादी पार्टी की ओर से जंतर-मंतर के मार्च में कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, तो राहुल गांधी ने दूसरी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं से फोन पर संपर्क कर उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया। वहीं, केसी वेणुगोपाल को सहयोगी दलों के अन्य नेताओं से समन्वय बनाने की जिम्मेदारी दी गई।
छोटे दलों को भी मिली बराबर अहमियत
तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों के कुछ नेताओं ने माना कि इस बार कांग्रेस ने सहयोगियों को साथ लेकर चलने पर अधिक जोर दिया। उनके मुताबिक, आमतौर पर कांग्रेस गठबंधन में बड़ी पार्टी की भूमिका में रहती है, लेकिन इस बार छोटे दलों को भी पर्याप्त महत्व देने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान भी इसका उदाहरण देखने को मिला। राहुल गांधी जिस खुले ट्रक से मार्च का नेतृत्व कर रहे थे, उसमें सहयोगी दलों के नेताओं और छात्र नेताओं को भी जगह दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए कांग्रेस के कुछ नेताओं को ट्रक से उतरने के लिए कहा गया।
कर्नाटक के एक कांग्रेस सांसद ने इसे संदेश देने की कोशिश बताया कि प्रदर्शन किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विपक्षी दलों की साझा मुहिम है।
समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने भी कांग्रेस के साथ बेहतर समन्वय की बात कही। उनके मुताबिक, सहयोगियों को साथ लेकर चलने के प्रयास का असर राहुल गांधी के आवास पर मंगलवार को हुई INDIA गठबंधन की बैठक में भी दिखा, जिसमें समाजवादी पार्टी के 12 सांसद शामिल हुए।
तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने भी कहा कि इस बार कांग्रेस ने सहयोगी दलों से आगे निकलने की कोशिश नहीं की और दूसरी पार्टियों ने भी इसी तरह का रवैया अपनाया।
‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता
केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, निर्वाचन आयोग से जुड़े हालिया खुलासों के बाद कांग्रेस कार्यसमिति और INDIA गठबंधन की बैठक में ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने पर सहमति बनी।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद इस मुद्दे पर विपक्षी दल साथ आए हैं। केरल में कांग्रेस और माकपा एक-दूसरे के खिलाफ हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में माकपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच भी राजनीतिक विरोध है। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दे पर दोनों पक्षों ने साझा रुख अपनाया है।
वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी लगातार गठबंधन के सहयोगियों के बीच दूरियां कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस बार विपक्षी दलों के बीच समन्वय पहले से बेहतर रहा है।
छात्र संगठनों और नागरिक समाज को भी जोड़ा
कांग्रेस ने प्रदर्शन का दायरा बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों के अलावा छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की पहल की। रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार शाम को सोमवार के मार्च में सभी को आमंत्रित करने का सुझाव राहुल गांधी की कोर टीम के एक सदस्य ने दिया था।
इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की छात्र नेता नेहा बोरा समेत अन्य लोगों से संपर्क किया गया। जब इन प्रतिनिधियों ने गांधी परिवार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ कुछ दूरी तक यात्रा करने के लिए बस में जगह मांगी, तो उनकी मांग स्वीकार कर ली गई।
कांग्रेस से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य प्रदर्शन में शामिल लोगों का दायरा बढ़ाना और निर्वाचन आयोग के खिलाफ आवाज उठा रहे विभिन्न समूहों को एक मंच पर लाना था।
