आखिर कौन हैं एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित? लखनऊ से है गहरा नाता, पिता रहे शिक्षक; अब संभालेंगे वायुसेना की कमान

लखनऊ: ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित अब भारतीय वायुसेना के प्रमुख बनने जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को उनकी नियुक्ति का ऐलान किया। वह मौजूदा वायुसेना उप प्रमुख के पद पर हैं और 31 अक्तूबर से देश के 29वें एयर चीफ ऑफ स्टाफ की जिम्मेदारी संभालेंगे। खास बात यह है कि आशुतोष दीक्षित का लखनऊ से सीधा संबंध है और एनडीए में चयन से पहले उनकी शुरुआती पढ़ाई राजधानी में ही हुई है।

लखनऊ में हुई शुरुआती पढ़ाई, पिता थे शिक्षक

आशुतोष दीक्षित की जड़ें लखनऊ से जुड़ी हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा राजधानी में हुई। उनके पिता पीसी दीक्षित डीएवी डिग्री कॉलेज में समाजशास्त्र के अध्यापक रह चुके हैं।

वर्ष 1999 में पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार कुछ समय तक चारबाग की बरहा कॉलोनी में रहा। इसके बाद परिवार साउथ सिटी स्थित छोटे बेटे अमिताभ दीक्षित के आवास पर रहने चला गया। अमिताभ दीक्षित एलआईसी में कार्यरत हैं। आशुतोष दीक्षित के पिता का दो साल पहले निधन हो गया था।

31 अक्तूबर से संभालेंगे वायुसेना की कमान

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के 29वें एयर चीफ ऑफ स्टाफ होंगे। उनकी नियुक्ति 31 अक्तूबर से प्रभावी होगी। मौजूदा समय में वह वायुसेना के वाइस चीफ के पद पर तैनात हैं।

उन्हें एक कुशल रणनीतिकार के तौर पर देखा जाता है। अपने सैन्य करियर में उन्हें वायुसेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

मिराज-2000 से तेजस तक उड़ाने का अनुभव

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को कई प्रमुख विमानों को उड़ाने का अनुभव है। इनमें मिराज-2000, मिग, जगुआर, तेजस, हॉक, आईएल-78, एएन-32, किरण, एचपीटी-32 और एवरो शामिल हैं।

लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने वायुसेना में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह पश्चिमी सेक्टर में फ्रंटलाइन फाइटर एयर बेस और दक्षिणी सेक्टर में फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाल चुके हैं।

3500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

आशुतोष दीक्षित डिप्टी चीफ ऑफ द एयर स्टाफ और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं। उन्हें 20 से अधिक प्रकार के विमानों को उड़ाने का अनुभव है।

उनके नाम 3500 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के बाद अब वायुसेना प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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